पहली महिला डकैत पुतलीबाई से लेकर मानसिंह, मोहर सिंह, माधौ सिंह जैसे डकैतों की गरजती बंदूकों से कांपने वाले चंबल के बीहड़ की स्थिति अब पूरी तरह बदल गई है।
चंबल की वादियां अब दुनिया भर में लुप्त प्राय स्थिति में पहुंचे घड़ियालों का घर बन गई हैं। डकैतों का खौफ खत्म होने से यहां पर्यटकों का जमावड़ा रहने लगा है। चंबल घाटी ईको टूरिज्म की ओर बढ़ चली है।
50 के दशक से 21वीं सदी की दहलीज तक चंबल के बीहड़, डकैतों के लिए कुख्यात रहे। यहां मानसिंह, मोहर सिंह, माधौ सिंह, तहसीलदार, निर्भय गुर्जर, रज्जन गुर्जर, जगजीवन परिहार, फक्कड़, अरविंद गुर्जर, पुतली बाई, फूलन देवी, लवली पांडेय, सीमा परिहार, कुसुमा नाइन, नीलम तक की दहशत रही है।