इस कानून को लेकर वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय, वाराणसी निवासी रूद्र विक्रम, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती द्वारा दायर की गई याचिका पहले ही से विचाराधीन है। अब चौथी याचिका दाखिल की गई है।
पूजा स्थल कानून 1991 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता ने कानून की धाराओं की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए कहा है कि यह कानून धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है। इससे पहले 25 मई को भी शीर्ष अदालत में कानून के खिलाफ एक याचिका दाखिल की गई थी। वहीं दो अन्य याचिकाएं भी अदालत में विचाराधीन हैं।
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तीन धाराओं को दी गई चुनौती
हालिया याचिका धार्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर की ओर से दाखिल की गई है। उन्होंने कानून की धारा दो, तीन और चार की संवैधानिक मान्यता को चुनौती देते हुए कहा कि ये धाराएं धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन करती हैं।
कृष्ण जन्म स्थान को लेकर उठी मांग
याचिका में कहा गया है कि हिंदू समुदाय के लोग लंबे समय से मथुरा में कृष्ण जन्म स्थान को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन पूजा स्थल कानून के चलते यह नहीं हो पा रहा है। आयोध्या के राम मंदिर को इस कानून से अलग रखा गया था जबकि, राम और कृष्ण दोनों ही भगवान विष्णु के अवतार हैं। इस कानून को लेकर वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय, वाराणसी निवासी रूद्र विक्रम, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती द्वारा दायर की गई याचिका पहले ही से विचाराधीन है।
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क्या है कानून?
इस कानून के मुताबिक 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता। अगर कोई ऐसा करने की कोशिश करता है तो उसे एक से तीन साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। अयोध्या का मामला उस वक्त कोर्ट में था इसलिए उसे इस कानून से अलग रखा गया था।