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डिजिटल युग में निजता को सरकार, हैकरों और निजी कंपनियों से चुनौती : जस्टिस चंद्रचूड़

Sun, 23 Feb 2020 09:51 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने रविवार को कहा कि डिजिटल युग में निजता को सरकार, हैकरों और निजी कंपनियों से चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को निजता के अधिकारों को अन्य अधिकारों और पूरक मौजूदा विधायी ढांचे के साथ संतुलित करते हुए निपटना पड़ता है।

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‘इंटरनेट के युग में नागरिकों की रक्षा में न्यायपालिका की भूमिका’ विषय पर उन्होंने कहा कि इन तीन ‘एक्टरों’ से पेश चुनौतियां कई चिंताएं उत्पन्न करती हैं। पहली यह कि इससे डाटा के सार्वजनिक होने और निजी सूचना के दुरुपयोग की आशंका रहती है।

उन्होंने कहा कि दूसरा, डाटा का इस्तेमाल लोगों के बारे में जानकर उनकी प्रोफाइलिंग करने और कुछ विशेष समूहों के साथ भेदभाव के लिए किया जा सकता है। तीसरा, मुक्त अभिव्यक्ति और सूचना के खुलासे पर एक हतोत्साहित करने वाला प्रभाव होता है।
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जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि मुद्दा यह है कि कैसे न्यायाधीशों के रूप में हम एक ऐसे युग में व्यक्तियों की स्वायत्तता और सूचनात्मक आत्मनिर्णय को संरक्षित कर सकते हैं, जहां प्रौद्योगिकी हमारे जीवन के हर पहलू को नियंत्रित करती है। या निजता एक भ्रम है? उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति इंटरनेट पर किसी पुस्तक या गंतव्य के बारे में सर्च या खोज करता है तो स्क्रीन तुरंत पॉप-अप विज्ञापनों से भर जाती है।

उन्होंने कहा कि यदि आप एक विचार की खोज करते हैं, तो आपके सामने स्क्रीन पर बड़ी संख्या में विचार उभर आते हैं...। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में प्रत्येक व्यक्ति की पहचान को सूचना के टेराबाइट्स से देखा जाता है और प्रत्येक व्यक्ति को इंटरनेट पर उस सूचना के संग्रह के लिहाज से देखा जाता है जो उसकी खरीदारी की पसंद, सोशल मीडिया स्वरूप, भौगोलिक स्थान और व्यक्तिगत बॉयोमीट्रिक सूचना से संबंधित होता है। जस्टिस चंद्रचूड़ 2022 में देश के अगले चीफ जस्टिस बन सकते हैं।  

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