सर्वाइकल कैंसर जहां महिलाओं के लिए जानलेवा होता है। वहीं इसका वायरस पुरुषों को नपुंसक बना सकता है। अर्जेंटीना के एक चिकित्सा अध्ययन में पता चला है कि पुरुषों में यह वायरस शुक्राणु खत्म करता है जिसकी वजह से उनकी प्रजनन क्षमता खराब होने लगती है। जानकारी के अनुसार, ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) एक यौन संचारित संक्रमण है, जिसमें उच्च और कम जोखिम वाले वायरस शामिल हैं।
उच्च जोखिम वाले वायरस में संक्रमण जानलेवा तक हो सकता है जबकि कम जोखिम वाले वायरस से सौम्य मस्से या निशान होते हैं। अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने उच्च जोखिम वाले वायरस से संक्रमित पुरुषों में मृत शुक्राणुओं की मात्रा अधिक पाई, जिससे उनकी प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। अर्जेंटीना और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ कॉर्डोबा के शोधकर्ताओं का यह अध्ययन फ्रंटियर्स इन सेल्युलर एंड इंफेक्शन माइक्रोबायोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। इसमें 205 वयस्क पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता का अध्ययन किया। इस दौरान करीब 39 लोग एचपीवी संक्रमित पाए गए जिनमें से 20 मरीजों में वायरस का उच्च जोखिम स्वरूप मिला। वहीं सात मरीजों में कम जोखिम वाला स्वरूप था। इनके अलावा 12 ऐसे मरीज भी मिले जिनमें वायरस के उच्च या कम जोखिम वाले स्वरूप की पहचान नहीं हो पाई।
बारीकी से विश्लेशण में सामने आई खामी
प्रारंभिक तौर पर जांच में पुरुषों के वीर्य की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं मिला लेकिन जब अधिक बारीकी से विश्लेषण किया तो शोधकर्ताओं ने पाया कि उच्च जोखिम वाले वायरस से संक्रमित पुरुषों से लिए गए नमूनों में प्रतिरक्षा कोशिकाओं में श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या काफी कम थी। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन मरीजों में श्वेत रक्त कोशिकाएं कम होने से रिकवरी में काफी नुकसान होता है। यह भी साक्ष्य मिले हैं कि एचपीवी के उच्च जोखिम वाले स्वरूप से संक्रमित पुरुषों के शुक्राणु ऑक्सीडेटिव तनाव के कारण बार-बार क्षतिग्रस्त हो सकते हैं, जिसका आकलन प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों (आरओएस) के उच्च उत्पादन से किया जा सकता है।
शोधकर्ता प्रो. रिवेरो ने कहा, “हमने निष्कर्ष निकाला है कि उच्च जोखिम वाले एचपीवी वायरस से संक्रमित पुरुषों में ऑक्सीडेटिव तनाव और मूत्रजननांगी मार्ग में कमजोरी शुक्राणु मृत्यु दर में वृद्धि करती है लेकिन कम जोखिम वाले वायरस से संक्रमित पुरुषों में ऐसा देखने को नहीं मिला है।”