राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक अभी लोकसभा में पारित भी नहीं हुआ है इसे राज्यसभा में रोकने की रणनीति बनने लगी है। इस विधेयक के खिलाफ दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी खुलकर विरोध में उतर आई है। आप राज्यसभा में विधेयक पर विपक्षी दलों के अलावा उन दलों को भी साथ लेना चाहती है जो सरकार में शामिल नहीं हैं।
राज्यसभा में तीन सांसदों वाली आप अगर विपक्षी सांसदों की जोड़ भी लेगी तो भी ये संख्या अकेले भाजपा के 95 सांसदों के करीब पहुंचती है। ऐसे में चुनाव की नौबत आने पर भी अंक गणित सरकार के पक्ष में दिखता है।
आप सांसद संजय सिंह इसी रणनीति में जुट गए हैं कि किस तरह जनता की चुनी हुई सरकार की अपेक्षा उपराज्यपाल की शक्तियों में इजाफा करने वाले विधेयक को रोका जा सके। संजय सिंह दलों के नेताओं से व्यक्तिगत तौर पर मिलकर विधेयक के विरोध में एकजुट करने में जुटे हैं।
विपक्षी दलों में सबसे अधिक 36 सांसद कांग्रेस हैं। कांग्रेस भी विधेयक के खिलाफ खुलकर है। विपक्षी दलों की संख्या देखें तो टीएमसी-12, सीपीआई-1, सीपीआईएम-5, डीएमके-7, आरजेडी-5, एनसीपी-4, सपा-5, शिवसेना-3, तेलंगाना राष्ट्र समिति-7, शिरोमणि अकाली दल-3, जेएमएम-1, यूएमएल-1, वाईएसआरसीपी-6 जैसे दल विधेयक के खिलाफ वोट कर सकते हैं। आम आदमी पार्टी बीजू जनता दल के 9 सांसदों, बीएसपी-3 आदि से भी समर्थन चाहती है।