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CAPF: नई सीएपीएफ इकाइयों को मणिपुर और G-20 शिखर सम्मेलन में स्थानांतरित करेगा केंद्र, बना रहा योजना

Tue, 22 Aug 2023 04:47 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

CAPF: आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि केंद्र सरकार सीएपीएफ की 20-22 नई कंपनियों को मणिपुर के जातीय हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर सकती है। 
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सीएपीएफ - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों की वापसी हो चुकी है। आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि केंद्र सरकार सीएपीएफ की 20-22 नई कंपनियों को मणिपुर के जातीय हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर सकती है। 

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ये कंपनियां केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की लगभग 125 ऐसी इकाइयों के अतिरिक्त होंगी जो मई के पहले सप्ताह में हिंसा भड़कने के बाद से मणिपुर में पहले से ही तैनात हैं। यह योजना बनाई गई है कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) सहित सीएपीएफ की लगभग 20-22 कंपनि को योंपहले चरण मणिपुरमें में तैनात किया जाएगा।
 

सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इन इकाइयों को जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा ड्यूटी से हटाया जा रहा है, क्योंकि इसे अब तीर्थयात्रियों के लिए बंद घोषित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि अमरनाथ यात्रा सुरक्षा ड्यूटी के लिए तैनात करीब 10-15 और कंपनियों को बाद में मणिपुर भेजा जा सकता है।

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 20 अगस्त को घोषणा की थी कि तीर्थयात्रियों की संख्या में कमी और दक्षिण कश्मीर हिमालय में भगवान शिव के गुफा मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग की पटरी को बहाल करने के काम के मद्देनजर 23 अगस्त से अमरनाथ यात्रा अस्थायी रूप से निलंबित रहेगी। हालांकि, सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि 'चारी मुबारक' (भगवान शिव की पवित्र छड़ी) 31 अगस्त को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यात्रा के समापन के मौके पर पारंपरिक पहलगाम मार्ग से आगे बढ़ेगी।

एक जुलाई से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा के लिए सीएपीएफ की 140 से अधिक कंपनियों को दो मार्गों अनंतनाग में 48 किलोमीटर लंबे पारंपरिक नुनवान-पहलगाम मार्ग और जम्मू कश्मीर के गांदेरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग पर तैनाती के तहत भेजा गया है। कश्मीर घाटी में पहले से मौजूद सीएपीएफ और सेना की इकाइयां भी इस सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा थीं। 

सीएपीएफ की एक कंपनी में करीब 70-80 कर्मी होते हैं। मणिपुर में मई के शुरुआत में हिंसा तब भड़की थी जब मैतई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' का आयोजन किया गया था। तब से मणिपुर में जातीय संघर्ष में 160 से अधिक लोग मारे गए हैं और कई सैकड़ों घायल हुए हैं।

सूत्रों ने कहा कि अमरनाथ यात्रा से हटाई गई सीएपीएफ की करीब 20 कंपनियों को भी सुरक्षा ग्रिड में तैनाती के लिए दिल्ली लाया जा रहा है जो राष्ट्रीय राजधानी में भारत की अध्यक्षता में 9-10 सितंबर को होने वाले जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन के लिए तैयार किया जा रहा है। 
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अधिकारियों के मुताबिक, सीएपीएफ के पास अगले कुछ महीनों में एक व्यस्त कार्यक्रम होगा क्योंकि यह अनुमान है कि इस साल के अंत में पांच राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए लगभग 300 कंपनियों को तैनात करने की आवश्यकता होगी।
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