केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने विशेष स्कूलों में विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात के मानदंडों और मानकों पर भारतीय पुनर्वास परिषद की सिफारिशें मानी हैं। विशेष शिक्षकों के लिए अलग मानदंड भी हैं, जो अकेले ही शिक्षा के साथ विशेष बच्चों को प्रशिक्षण और सामान्य शिक्षा प्रदान कर सकते हैं।
जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस एएस ओका और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ के समक्ष दाखिल एक अनुपालन हलफनामे में शिक्षा मंत्रालय ने उन मानदंडों और मानकों का उल्लेख किया है जिनके अनुसार अनुशंसित छात्र-शिक्षक (विशेष शिक्षा शिक्षक) अनुपात नियमित है और स्कूल के लिए प्राथमिक स्तर (10:1) है। उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्तर के लिए यह अनुपात 15:1 है।
भारतीय छात्रों को अब जल्द मिलेगा ऑस्ट्रेलिया से वीजा : धर्मेंद्र प्रधान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अब ऑस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों को वीजा की दिक्कत नहीं आएगी। दरअसल, ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर से प्रधान ने वीजा दिक्कत के अलावा कौशल विकास पर बात की थी। तब क्लेयर ने वीजा संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान का आश्वासन दिया।
इस दौरान क्लेयर को लेबर पार्टी की नई सरकार के तहत पदभार ग्रहण करने पर बधाई दी। प्रधान ने कौशल, उच्च शिक्षा व स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में गहन सहयोग और भारतीय श्रमशक्ति को विश्वस्तरीय कौशल बनाने पर बात की। प्रधान ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और गिफ्ट सिटी के संस्थानों के लिए अनुकूल वातावरण के बारे में जानकारी दी।
डीएसपी की हत्या का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
डीएसपी सुरेंद्र सिंह पर वाहन चढ़ाकर हत्या का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अरावली खनन मामले में न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता एडीएन राव ने जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया। राव ने पीठ को बताया कि अरावली मामले में आपके आदेश का अनुपालन करते वक्त डीएसपी की हत्या कर दी गई।
डीएसपी सुरेंद्र कुमार सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अरावली क्षेत्र से पत्थरों के खनन को रोकने के लिए कार्रवाई कर रहे थे। उसी वक्त उन्हें तेज रफ्तार ट्रक से रौंद दिया गया। राव ने कहा, पीठ इस मामले में प्रदेश सरकार से अब तक गई कार्रवाई की रिपोर्ट तलब कर सकता है। इस पर पीठ ने कहा, हम इस मामले को देखेंगे। एजेंसी
वन भूमि के उपयोग में परिवर्तन के लिए केंद्र की पूर्व अनुमति जरूरी : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वन भूमि के उपयोग में बदलाव के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक है। जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस सीटी रवि कुमार की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार या सक्षम अथॉरिटी अक्तूबर, 1980 के बाद से वन संरक्षण अधिनियम के तहत जंगल की जमीन को अन्य गतिविधियों के लिए इस्तेमाल की अनुमति नहीं दे सकती।
कोर्ट ने संबंधित अथॉरिटी को वन भूमि पर अवैध निर्माणों और अवैध संरचनाओं को हटाने का निर्देश दिया। हरियाणा के अनंगपुर के रहने वाले भूमि मालिकों, मैरिज हॉल व रेस्तरां मालिकों ने एनजीटी के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।