केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) के बारे में जानकारी दी। यूपीएस से अप पेंशन संबंधी चिंताओं का समाधान होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले 12 सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है।
न्यायिक अधिकारियों और हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जजों की पेंशन से जुड़े मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को अधिसूचित करने की जानकारी दी है। इस योजना से पेंशन संबंधित समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को 12 सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया ताकि नई योजना के प्रभावों का सही तरीके से मूल्यांकन किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
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सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार ने 25 जनवरी को यूपीएस को अधिसूचित किया है। इस योजना के तहत, न्यायिक अधिकारियों समेत सभी सरकारी कर्मचारियों को पेंशन संबंधी चिंताओं को हल करने की उम्मीद है।
एक नजर, क्या है यूपीएस?
वहीं बात अब यूपीएस की करें तो, इसके तहत सेवानिवृत्ति से पहले पिछले 12 महीनों में प्राप्त औसत मूल वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर पेंशन देने का प्रावधान है। यह योजना उन केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए है, जो राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत आते हैं और यूपीएस का विकल्प चुनते हैं। अगर कर्मचारी को सेवा से हटाया जाता है या वह इस्तीफा देता है, तो उसे यूपीएस या आश्वासन भुगतान नहीं मिलेगा। यह योजना 23 लाख सरकारी कर्मचारियों को यूपीएस और एनपीएस में से किसी एक को चुनने का विकल्प देती है।