केंद्र सरकार ने अटल भूजल योजना का विस्तार पांच और राज्यों तक करने का प्लान बनाया है, जिनमें बिहार, पंजाब और तमिलनाडु भी शामिल हैं। यह योजना पानी की कमी से जूझ रहे सात राज्यों में भूजल की स्थिति को सुधारने के मकसद से शुरू की गई थी। संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट में सोमवार को यह जानकारी दी गई।
विस्तारित योजना में ये पांच राज्य होंगे शामिल
जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग ने संसद की स्थायी समिति को सूचित किया कि वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इस योजना का विस्तार 8,200 करोड़ रुपये के बजट के साथ किया जाएगा। इन पांच राज्यों में आंध्र प्रदेश, बिहार, पंजाब, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल हैं। योजना का केंद्रीय क्षेत्रीय योजना (सीएसएस) के रूप में पुनर्गठन किया जा सकता है।
पांचों राज्यों से पिछले साल मांगी गई थी सहमति
विभाग ने बताया कि अटल भूजल योजना को सीएसएस में बदलने के लिए पिछले साल अगस्त में इन पांचों राज्यों से सहमति मांगी गई थी। पंजाब ने अपनी सहमति दे दी है, जबकि अन्य राज्यों से अभी जवाब मिलना बाकी है।
सात राज्यों के 80 जिलों में लागू है योजना
अटल भूजल योजना अप्रैल 2020 से लागू है और यह सात राज्यों के 80 जिलों की जल संकटग्रस्त 8,774 ग्राम पंचायतों में काम कर रही है। इन राज्यों में हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। योजना पांच वर्षों तक चलेगी।
योजना से छब्बीस जिलों में भूजल स्तर में वृद्धि हुई
इन राज्यों में देश के लगभग 37 फीसदी ऐसे इलाके हैं, जहां पानी की सबसे अधिक कमी है। जलशक्ति मंत्रालय ने संसद समिति को यह भी बताया कि योजना से 26 जिलों के 47 ब्लॉक और 813 ग्राम पंचायतों में भूजल स्तर में वृद्धि हुई है। मंत्रालय ने बताया कि अटल भूजल योजना का मुख्य उद्देश्य योजना क्षेत्र में भूजल का सतत प्रबंधन करना है। कृषि में जल की बचत माइक्रो-इरीगेशन, फसल विविधीकरण जैसी विधियों के जरिए किया जा रहा है। इसके अलावा,चेक डेम, तालाब, पर्कोलेशन टैंक और रिचार्ज शाफ्ट आदि जैसे जल पुनर्भरण के उपाय किए जा रहे हैं।