फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ISO Act: केंद्र ने इंटर-सेविस संगठन अधिनियम के तहत नियमों को किया अधिसूचित, 2023 में सदन से पास हुआ था बिल

Wed, 28 May 2025 07:57 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नए नियमों के तहत, यदि कमांडर-इन-चीफ या ऑफिसर-इन-कमांड छुट्टी पर हैं या किसी कारणवश अनुपस्थित हैं, तो उनके स्थान पर कार्यवाहक अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, जिसे अगले उच्च गठन की तरफ से अधिसूचित किया जाएगा।
विज्ञापन
रक्षा मंत्रालय (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्र सरकार ने इंटर-सेविस संगठन अधिनियम (आईएसओ एक्ट) के तहत नए नियमों को अधिसूचित किया है, जिससे सेना के विभिन्न अंगों में एकजुटता और कमांड की क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम सेना के संचालन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उठाया गया है। रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी गजट अधिसूचना 27 मई को जारी की गई थी। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ये नियम इंटर-सेविस संगठन के कमांड, नियंत्रण और अनुशासन को बेहतर बनाने में मदद करेंगे, जिससे सेना के कई अंगों के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित होगा।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - डेटा: संसद समितियों की बैठकों में नहीं रूचि ले रहे सांसद, भारत-PAK संबंधों पर ब्रीफिंग के दौरान ऐसा रहा हाल

अब पूर्ण रूप से लागू हुआ इंटर-सेविस संगठन अधिनियम 2023
इन नियमों के अधिसूचना के बाद, इंटर-सेविस संगठन (कमांड, कंट्रोलऔर डिसिप्लिन) अधिनियम 2023 अब पूर्ण रूप से लागू हो गया है। इससे आईएसओ के प्रमुखों को अधिक अधिकार मिलेंगे, जिससे वे जल्दी से अनुशासनात्मक मामलों का निपटारा कर सकेंगे और प्रक्रियाओं में किसी तरह की दोहराव से बच सकेंगे।
विज्ञापन


किस-किस को क्या अधिकार मिलेगा?
वहीं रक्षा मंत्रालय के बयान में कहा गया कि इस अधिनियम से कमांडर-इन-चीफ और ऑफिसर-इन-कमांड को यह अधिकार मिलेगा कि वे अपने तहत कार्यरत सेवा कर्मियों पर कमांड और नियंत्रण स्थापित करें, जिससे इन संगठनों में अनुशासन और प्रशासन प्रभावी तरीके से बनाए रखा जा सके। यह बिना किसी भी सेवा की विशेष शर्तों को बदले हुए होगा। इन नए नियमों का उद्देश्य अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने में मदद करना है। ये नियम आईएसओ के संचालन के लिए अनुशासन, प्रशासनिक नियंत्रण और ऑपरेशनल सामंजस्य के लिए एक मजबूत ढांचा स्थापित करेंगे।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - Savarkar Degree: अंग्रेजों ने सावरकर को बैरिस्टर की डिग्री देने से कर दिया था इनकार, अब फडणवीस करेंगे यह काम

2023 के मानसून सत्र में पास हुआ था बिल
यह बिल 2023 के मानसून सत्र में दोनों सदनों की तरफ से पास किया गया था और राष्ट्रपति की सहमति 15 अगस्त 2023 को प्राप्त हुई थी। यह अधिनियम 10 मई 2024 से प्रभावी हो गया है।

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें