पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान करतारपुर कॉरिडोर के जरिए गुरुद्वारा दरबार साहिब आने वाले श्रद्धालुओं पर 20 डॉलर प्रति व्यक्ति के हिसाब से फीस यानी 'जजिया' वसूलने पर अड़े हैं। वहीं भारत सरकार ने 20 डॉलर की फीस खत्म कराने के लिए पाकिस्तान सरकार से कई बार आग्रह किया है, लेकिन इमरान खान अपनी जिद पर कायम हैं। अब भारत में इस बात पर चर्चा जोरों पर है कि करतारपुर कॉरिडोर पर अगर फीस माफ नहीं होती है, तो सब्सिडी जैसे किसी प्रावधान पर विचार किया जा सकता है।
फीस खत्म कराने का हरसंभव प्रयास
केंद्र सरकार में उच्चपदस्थ सूत्र बताते हैं कि इस बारे में केंद्र और राज्य सरकारों में बातचीत संभव है। कौन कितना हिस्सा देगा, इस पर बातचीत हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार की पहली प्राथमिकता करतारपुर कॉरिडोर शुरु कराने के लिए जल्द से जल्द एमओयू साइन करना है। किस दिन होगा इसे लेकर इस बारे में अभी तक कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आ रही है। लेकिन यह तय है कि एमओयू साइन करने के दौरान पाकिस्तान सरकार के प्रतिनिधियों से 20 डॉलर की फीस खत्म कराने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। दूसरी ओर, एमओयू साइन करने से पहले जिस तरह की खबरें आ रही हैं, उससे नहीं लगता कि इमरान खान इस फीस को छोड़ देंगे।
जिन राज्यों से आएगी संगत वे देंगे सब्सिडी
पाकिस्तान की ओर से इस बाबत अधिकारिक बयान आ चुका है कि वे प्रति व्यक्ति 20 डॉलर की फीस हर हाल में वसूलेंगे। उधर, गुरु नानक देव जी के 17वें वंशज के तौर पर पहचाने जाने वाले बाबा सुखदेव सिंह बेदी कहते हैं कि सिख संगत इमरान खान से आग्रह करेगी कि वे यह फीस वसूलने का अपना फैसला बदल लें। अगर वे अपनी यह जिद नहीं छोड़ते हैं, तो इस बारे में केंद्र सरकार और पंजाब सरकार से बातचीत की जाएगी। इस मामले में दूसरे राज्य भी आगे आ सकते हैं। मसलन, जिस राज्य से भी सिख संगत करतारपुर गुरुद्वारे में आएगी, वहां की राज्य सरकारों से सब्सिडी का आग्रह किया जाएगा।
पंजाब पर सबसे ज्यादा आर्थिक बोझ
सूत्र बताते हैं कि सब्सिडी को लेकर केंद्र सरकार अकेले कोई फैसला नहीं ले सकती। इसमें राज्यों को सहयोग करना ही होगा। जिस राज्य से कोई व्यक्ति करतारपुर गुरुद्वारे आता है, तो वहां की सरकार उसे सब्सिडी दे सकती है। इस मामले में सबसे ज्यादा आर्थिक बोझ पंजाब सरकार पर पड़ेगा। इसलिए वहां अलग से कोई रास्ता निकालना होगा। इस मामले में दिल्ली सरकार पहले भी मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के माध्यम से इस तरह का प्रयास कर चुकी है। साठ साल से अधिक आयु वाले नागरिकों को कई तीर्थ स्थलों के निशुल्क दर्शन कराए जाते हैं।
दिल्ली सरकार भी करेगी पहल
दिल्ली सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि करतारपुर कॉरिडोर के लिए भी कुछ ऐसा सोचा जाएगा। हालांकि उन्होंने कहा, पहले भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले एमओयू को देखेंगे। इसमें क्या समझौता होता है, उसे देखकर आगे बढ़ा जाएगा। इतना तय है कि इस दिशा में दिल्ली सरकार अपना कुछ न कुछ योगदान देगी। उधर, पंजाब के राजनीतिक दलों में भी यह बहस अब धीरे-धीरे ऊपर उठने लगी है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इस बाबत प्रदेश के दूसरे राजनीतिक दलों की बैठक बुला सकते हैं। चूंकि करतारपुर गुरुद्वारा भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में रहने वाली सिख संगत के लिए भी बड़ी श्रद्धा का प्रतीक है, इसलिए सभी राजनीतिक दल इस विषय पर एकमत से कोई फैसला ले सकते हैं।