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Manipur: केंद्र ने मणिपुर से दो नए मार्ग पर हेलिकॉप्टर सेवाएं संचालित करने की दी अनुमति, ITLF ने किया यह दावा

Mon, 14 Aug 2023 08:45 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, इंफाल।

सार

एमएचए की ओर से जारी आदेश में कहा गया है, असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए इन दो नए मार्गों के संचालन के कारण प्रति वर्ष 750 उड़ान घंटे की मौजूदा सीमा पार होने की स्थिति में राज्य को अतिरिक्त उड़ान घंटे के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी जाती है।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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केंद्र ने मणिपुर सरकार को जातीय संघर्ष प्रभावित राज्य के दो स्थानों से पड़ोसी नागालैंड और मिजोरम तक हेलीकॉप्टर सेवाएं संचालित करने की अनुमति देने के लिए पत्र लिखा है। एक आधिकारिक आदेश में यह जानकारी दी गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) की ओर से चुराचांदपुर से आइजोल और कांगपोकपी या सेनापति से दीमापुर मार्गों के लिए अनुमति दी गई थी। आइजोल मिजोरम की राजधानी है, जबकि दीमापुर नगालैंड का वाणिज्यिक केंद्र है।

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एमएचए की ओर से जारी आदेश में कहा गया है, असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए इन दो नए मार्गों के संचालन के कारण प्रति वर्ष 750 उड़ान घंटे की मौजूदा सीमा पार होने की स्थिति में राज्य को अतिरिक्त उड़ान घंटे के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी जाती है। हालांकि, यदि आवश्यक हो तो उड़ान के घंटे में वृद्धि के लिए विशिष्ट प्रस्ताव गृह मंत्रालय को पेश किया जा सकता है।

आईटीएलएफ ने किया यह दावा
कुकी-जो समुदाय के संगठन इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF) ने दावा किया कि संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने 30 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनकी मणिपुर यात्रा के दौरान मुलाकात के दौरान हेलिकॉप्टर सेवा के लिए नए मार्गों की मांग की थी।
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मणिपुर के इंफाल से चुराचांदपुर और जिरीबाम तक यात्री हेलीकॉप्टर सेवाएं उपलब्ध हैं। मणिपुर में लगभग तीन महीने पहले जातीय हिंसा भड़क उठी थी, तब से अब तक 160 से अधिक लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में जनजातीय एकजुटता मार्च आयोजित किए जाने के बाद तीन मई को हिंसा भड़क उठी थी।

मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी, जिनमें नगा और कुकी शामिल हैं, 40 प्रतिशत हैं और मुख्य रूप से पहाड़ी जिलों में रहते हैं।

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