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पैलेट की जगह असली गोली चलती तो 20 हजार जानें चली जातीं : सुप्रीम कोर्ट

Tue, 11 Apr 2017 09:19 AM IST
amarujala.com- Presented by: संदीप भट्ट
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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कश्मीर घाटी में प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए गोला-बारूद या जानलेवा अस्त्र-शस्त्र के इस्तेमाल से पहले आखिरी विकल्प के तौर पर पैलेट गन का प्रयोग किया जाता है। सरकार ने बताया कि पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर नई प्रक्रिया बनाई गई है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर सशस्त्र बल पैलेट गन की जगह असली गोली का इस्तेमाल करते तो अब तक करीब 20 हजार लोग जान गंवा चुके होते।
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चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान यह पाया कि कश्मीर घाटी में प्रदर्शनकारियों की भीड़ में करीब 90 फीसदी 13-20 आयु वर्ग के हैं। वास्तव में पीठ ने यह समझने की कोशिश की आखिर भीड़ में बच्चे और किशोर इतने अधिक क्यों हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि लोगों की मौत दुखद है। इसे रोका जाना चाहिए लेकिन साथ ही सार्वजनिक संपत्तियों का भी नुकसान नहीं होना चाहिए। किसी मुद्दे को लेकर होने वाले प्रदर्शन को तो हम नहीं रोक सकते लेकिन हमें भीड़ द्वारा बेवजह बल के प्रयोग करने को रोकना होगा। चीफ जस्टिस ने यह भी कहा, ‘एक इंसान होने के नाते हमें क्या करना चाहिए अगर भीड़ अपने हाथों में पेट्रोल बम लिए हमारे घर की ओर बढ़ रही हो।’

वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि हमारा इरादा लोगों को मारने का नहीं है लेकिन सवाल यह है कि सुरक्षा बलों से क्या उम्मीद की जानी चाहिए जब नकाबपोश प्रदर्शनकारी चारों ओर से हमला करने लगे। हम पैलेट गन का इस्तेमाल तब करते हैं जब हिंसक भीड़ बिल्कुल नजदीक आ जाती है और वहां से जाने का नाम नहीं लेती है। हमारे सशस्त्र बल शरारती नहीं हैं लेकिन वहां कि स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने यह भी बताया कि रविवार को हुए उपचुनाव के दौरान करीब 100 सुरक्षाकर्मी घायल हुए।
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मालूम हो कि गत 28 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पैलेट गन का विकल्प तलाशने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कल्याणकारी राष्ट्र होने के नाते यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि लोग, खासकर बच्चों को शारीरिक नुकसान न पहुंचाया जाए।

सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता संगठन जम्मू एवं कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से कहा कि इस तरह के मामले में एसोसिएशन का भूमिका बेहद अहम हो जाती है। एसोसिएशन को इसमें अदालत की मदद करनी चाहिए। पीठ ने कहा कि इस मामले को राजनीति से दूर रखकर एसोसिएशन को मदद करनी चाहिए, जिससे कि इतिहास रचा जा सके। पीठ ने एसोसिएशन को केंद्र सरकार के जवाब पर अपनी राय देने का निर्देश देते हुए सुनवाई 28 अप्रैल तक के लिए टाल दी।
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रबर की गोली का भी किया जाएगा इस्तेमाल

alternatives to pellet guns
अटार्नी जनरल ने पीठ से कहा कि सात-आठ अप्रैल को हमने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी किया है। इसके तहत यह तय किया गया कि किन परिस्थितियों में सुरक्षा बलों को कौन से उपकरण का इस्तेमाल करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि इसमें रबर की गोली के इस्तेमाल को भी जोड़ा गया है। हालांकि उन्होंने यह बताया कि बहुत नजदीक से इसका इस्तेमाल करने पर यह मानव शरीर के सात-आठ मिलीमीटर भीतर तक जा सकती है। उन्होंने यह बताया कि रबर की इस गोली को बंदूक से चलाया जा सकता है।

विकल्पों के इस्तेमाल से नहीं मिल रही सफलता
भीड़ पर नियंत्रण पाने की बढ़ती चुनौती का जिक्र करते हुए अटार्नी जनरल रोहतगी ने अदालत में कहा, ‘पानी की बौछार, लेजर रोशनी का इस्तेमाल करके लोगों की आंखें चकाचौंध करना और बेहद तेज शोर पैदा करने वाले उपकरणों का इस्तेमाल और मिर्च पाउडर वाला पावा शेल भी भीड़ और प्रदर्शनकारियों को हटाने में सफल साबित नहीं हो पा रहा है। इन परिस्थितियों में विवादित पैलेट गन ही सबसे कारगर हथियार है।
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