बयान में कहा गया, एनएससीएन/एनके और एनएससीएन/आर के साथ 28 अप्रैल 2023 से 27 अप्रैल 2024 तक और एनएससीएन/के-खांगो के साथ 18 अप्रैल, 2023 से 17 अप्रैल, 2024 तक संघर्ष विराम समझौतों को एक वर्ष की अवधि के लिए बढ़ाने का फैसला लिया गया।
केंद्र ने तीन नगा विद्रोही समूहों के साथ हुए संघर्षविराम समझौते को गुरुवार को एक और साल के लिए बढ़ा दिया। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने एक बयान में कहा, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड/एनके, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड/रिफॉर्मेशन और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड/के-खांगो के साथ संघर्ष विराम समझौतों को 28 अप्रैल 2023 से 27 अप्रैल 2024 तक एक वर्ष की और अवधि के लिए बढ़ा दिया गया है।
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बयान में कहा गया, एनएससीएन/एनके और एनएससीएन/आर के साथ 28 अप्रैल 2023 से 27 अप्रैल 2024 तक और एनएससीएन/के-खांगो के साथ 18 अप्रैल, 2023 से 17 अप्रैल, 2024 तक संघर्ष विराम समझौतों को एक वर्ष की अवधि के लिए बढ़ाने का फैसला लिया गया। इन समझौतों पर 6 अप्रैल, 2023 को हस्ताक्षर किए गए थे।
8 सितंबर, 2021 को केंद्र सरकार ने उग्रवादी निकी सुमी के नेतृत्व वाले नागा विद्रोही गुटों के साथ संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। निकी सुमा पर पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 10 लाख रुपये की घोषणा की थी। उसने कथित तौर पर भारतीय सेना के 18 जवानों की हत्या की थी। ये एनएससीएन-आईएम और एनएससीएन-के से अलग हुए गुट हैं।
भारत सरकार ने स्थायी समाधान खोजने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में 3 अगस्त, 2015 को एनएससीएन-आईएम के साथ एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। फ्रेमवर्क समझौता 18 वर्षों तक चली 80 से अधिक दौर की वार्ता के बाद आया, जिसमें पहली सफलता 1997 में मिली जब नागालैंड में दशकों के विद्रोह के बाद संघर्ष विराम समझौते पर मुहर लगाई गई, जो 1947 में भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद शुरू हुआ था।