केंद्र सरकार ने रॉ के विदेशों में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को दी जाने वाली कानूनी सहायता के बारे में जानकारी देने से मना कर दिया है। ये उसने पाकिस्तान के भारतीय रॉ एजेंट को गिरफ्तार करने का दावा करने के बाद कहा है।
सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी सरकार ने यह कहकर देने से मना कर दी कि रॉ की ऐसी कोई भी जानकारी कानूनन आरटीआई से बाहर है। कैबिनेट सचिवालय ने आरटीआई का जवाब देते हुए कहा कि रॉ के मामले में सिर्फ मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की जानकारी ही दी जा सकती।
आरटीआई फाइल करने वाले वेंकटेश नायक ने बताया कि उन्होंने अपनी एप्लिकेशन में साफ-साफ लिखा था कि उन्हें विदेशों में काम कर रहे रॉ एजेंटों को खुद की सुरक्षा के लिए दिए गए प्रशिक्षण के बारे में जानकारी नहीं चाहिए। नायक ने बताया कि यह सफाई इसलिए दी गई थी, ताकि वह यह न समझें कि रॉ के प्रशिक्षण और अन्य चीजों के बारे में जानकारी मांग रहा हूं।
नायक कहते हैं कि अगर कोई भारतीय खुफिया एजेंसी का एजेंट विदेश में मारा जाता है, तो ऐसी स्थिति में क्या किया जाए या किया जाना चाहिए, इसको लेकर पब्लिक डोमेन में कोई जानकारी नहीं है। यह एक चिंता का विषय है। ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव से जुड़े नायक कहते हैं कि उन्होंने सिर्फ विदेश में काम कर रहे एजेंटों को मिल रही कानूनी सहायता के बारे में जानकारी हासिल करनी चाही थी, न कि उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में।