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Amit Shah: केंद्रीय गृहमंत्री बोले, 90 फीसदी दोषसिद्धि दर हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है केंद्र

Sun, 26 Jun 2022 08:47 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद

सार

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार छह साल से अधिक कारावास की सजा वाले सभी मामलों में फोरेंसिक जांच को अनिवार्य बनाने की दिशा में काम कर रही है।
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह - फोटो : Social media
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विस्तार
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केंद्रीय गृहमंत्रालय नब्बे फीसदी तक दोषसिद्धि दर हासिल करने और देश में नागरिकों के लिए अनुकूल और प्रभावी आपराधिक न्याय प्रणाली प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को यह बात कही। 
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उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को अत्यधिक महत्व देती है और अपराध कापता लगाने और रोकथाम व प्रभावी कानून प्रवर्तन के सिस्टम को मजबूत करके जन कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। 

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि उन्होंने ये बातें गृह मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक को संबोधित करते हुए कही। गृह मंत्री ने भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम में प्रस्तावित व्यापक संशोधनों के माध्यम से प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में एक स्वतंत्र अभियोजन निदेशालय और एक स्वतंत्र फोरेंसिक विज्ञान निदेशालय की स्थापना का आह्वान किया।
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उन्होंने कहा कि मोदी सरकार छह साल से अधिक कारावास की सजा वाले सभी मामलों में फोरेंसिक जांच को अनिवार्य बनाने की दिशा में काम कर रही है। बैठक में विशेष रूप से फोरेंसिक जांच पर आपराधिक न्याय प्रणाली की बढ़ती निर्भरता को ध्यान में रखते हुए देश में उपलब्ध फोरेंसिक विज्ञान क्षमताओं की समीक्षा की गई।

शाह ने अपराधियों द्वारा टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को देखते हुए जांच एजेंसियों को अपराधियों से एक कदम आगे रहने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि केंद्र राज्य सरकारों के सहयोग से पुलिस जांच, अभियोजन और फोरेंसिक में सुधार के लिए त्रि-आयामी दृष्टिकोण पर काम कर रहा है। 

उन्होंने कहा कि लक्षित सजा दर हासिल करने के लिए टेक्नोलॉजी आधारित और साक्ष्य आधारित जांच पर ध्यान केंद्रित करने का यह सही समय है। गृहमंत्री ने समिति के सदस्यों को प्रस्तावित सुधारों को लागू करने के लिए आवश्यक क्षमता निर्माण की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी।

शाह ने कहा कि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय की स्थापना कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की जनशक्ति को प्रशिक्षित करने के लिए की गई है ताकि उन्हें अपराध, विशेष रूप से साइबर अपराध, डार्क-नेट आदि से निपटने के लिए नई तकनीक के उपयोग में प्रशिक्षित किया जा सके। इसके अलावा नई टेक्नोलॉजी में युवाओं की विशेषज्ञता और इनोवेशन को आकर्षित करने के लिए हैकथॉन का भी आयोजन किया जा रहा है।

बैठक में शामिल होने वाले सांसदों में एनके प्रेमचंद्रन, कुंवर दानिश अली, राम शंकर कठेरिया, सीएम रमेश, राजेंद्र अग्रवाल, लॉकेट चटर्जी, नीरज शेखर, पीपी चौधरी, केसी राममूर्ति, नबा सरानिया, के रवींद्र कुमार और के जी माधव शामिल रहे।
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