केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में केंद्र और असम सरकार ने असम के आठ आदिवासी संगठनों के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि यह असम और उत्तर पूर्व के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए मोदी सरकार द्वारा कई पहल की गई हैं। असम के आदिवासी संगठनों के लगभग 1100 लोग आज हथियार डाल कर मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
नशा मुक्त, आतंकवाद मुक्त हो असम और पूर्वोत्तर का क्षेत्र
आगे उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र नशा मुक्त, आतंकवाद मुक्त, विवाद मुक्त और पूर्ण विकसित हो। इस दिशा में मोदी सरकार काम कर रही है।
इस संगठनों के साथ हुए हस्ताक्षर
आठ संगठनों में बिरसा कमांडो फोर्स (बीसीएफ), आदिवासी पीपुल्स आर्मी (एपीए) ऑल आदिवासी नेशनल लिबरेशन आर्मी (एएनएलए), असम की आदिवासी कोबरा मिलिट्री (एसीएमए) और संथाली टाइगर फोर्स (एसटीएफ) शामिल हैं। इसी के साथ अन्य तीन संगठन बीसीएफ, एएनएलए और एसीएमए संगठन शामिल हैं।
10 साल पहले ही शुरू हो गई थी शांति वार्ता
संगठनों के साथ शांति वार्ता 10 साल पहले ही शुरू हो गई थी जिसको हस्ताक्षर करके आज औपचारिक रूप दिया गया है। बिरसा कमांडो फोर्स, आदिवासी पीपुल्स आर्मी, ऑल आदिवासी नेशनल लिबरेशन आर्मी, असम की आदिवासी कोबरा मिलिट्री और संथाली टाइगर फोर्स 2012 से सरकार के साथ संघर्ष विराम में हैं और तब से उग्रवादी संगठनों के कार्यकर्ता निर्धारित शिविरों में रह रहे हैं जिनकी देखभाल सरकारें कर रही हैं।
सीएम बोले- असम में एक नए युग की शुरुआत होगी
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा मुझे यकीन है कि समझौते पर हस्ताक्षर से असम में शांति और सद्भाव के एक नए युग की शुरुआत होगी। बता दें कि इसी साल 27 जनवरी को राज्य के दो उग्रवादी गुटों के कुल 246 विद्रोहियों ने हथियार डाल दिए थे और मुख्यधारा में लौट आए।
असम के मुख्यमंत्री बोले- 1170 उग्रवादी करेंगे सरेंडर
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा है कि गुरुवार को भारत सरकार, असम सरकार और पूर्वोत्तर के आठ आदिवासी उग्रवादी संगठनों ने गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में एक समौझेते पर हस्ताक्षर किए। उग्रवादी समूहों ने शांति स्थापित करने में सरकार की मदद करने का आश्वासन दिया है। असम के मुख्यमंत्री ने बताया कि समझौते के तहत 1170 उग्रवादी समर्पण करेंगे। इसके अलावा 300 से ज्यादा ऑटोमैटिक वेपर सरकार को सौंप दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इसे असम में शांति स्थापित करने की ओर यह बड़ा कदम करार दिया। हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर में जो काम हो रहा है उससे यह देश की अष्टलक्ष्मी बनेगा। वहीं उग्रवादी समूहों के साथ समझौते के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार 2024 तक हर विवाद को खत्म करना चाहती है और पूर्वोत्तर में शांति बहाल करना चाहती है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से जनजाति समूहों को न्याय मिलेगा और आगे बढ़ने का मौका भी मिलेगा।