भ्रष्टाचार की शिकायतों के निपटारे के लिए की गई कार्रवाई का अब अधिकतम 15 दिन में जवाब देना होगा। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने केंद्र सरकार के विभागों में केंद्रीय सतर्कता अधिकारियों (सीवीओ) द्वारा इन शिकायतों पर की जा रही कार्रवाई में हीलाहवाली से नाराज होकर व्यवस्थागत बदलाव करने का फैसला किया है।
बृहस्पतिवार को जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार आयोग अब भ्रष्टाचार की रोकथाम में जांच करके सहयोग करने वाले सीवीओ को बार-बार रिमाइंडर भेजने से परहेज करेगा।
आयोग ने कहा कि किसी मामले पर उनसे मांगी जा रही विस्तृत जानकारी या तो अधूरी होती है या फिर उससे संबंधित मामले पर पर्याप्त ढंग से विचार या विश्लेषण नहीं किया जाता है। इसकी वजह से आयोग इन विभागों या संगठनों की ओर से भेजी गई जानकारी पर अपनी सलाह नहीं दे पाता।
आयोग ने कहा कि कई बार सीवीओ द्वारा जवाब दिए जाने या विस्तृत जानकारी देने में देरी होती है और इसमें कई महीने या साल लग जाते हैं, जिससे कीमती समय बर्बाद होता है और संदिग्ध या आरोपी अधिकारियों और आम लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रभाव कम हो जाता है। इसलिए, आयोग को लगता है कि जांच प्रणाली में व्यवस्थागत बदलाव की आवश्यकता है।
सीवीसी ने कहा कि ऐसे लंबित मामलों या शिकायतों या विस्तृत जानकारी या स्पष्टीकरण आदि के लिए 30 सितंबर, 2020 से संबंधित अतिरिक्त सचिव की निगरानी में आयोग में आंतरिक समीक्षा की जाएगी।
आदेश के अनुसार किसी भी जानकारी या स्पष्टीकरण के लिए विभाग या संगठन के सीवीओ से संबंधित अधिकारी को केवल एक बार रिमाइंडर भेजा जाएगा, जिस पर अधिकतम 15 दिन में जवाब देना होगा। यदि कोई जवाब नहीं मिलता है, तो सीवीसी के अतिरिक्त सचिव, संबंधित विभाग या संगठन के सीवीओ से बात करेंगे और सात दिनों के भीतर जवाब भेजने के लिए कहेंगे।