केंद्रीय सतर्कता आयोग ने सभी सरकारी संगठनों, बैंकों और बीमा कंपनियों से भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक मामलों के निपटारे में छह महीने की समयसीमा का पालन करने को कहा है।
आयोग ने अपने सोमवार को दिए आदेश में कहा, कोई भी अस्पष्ट, अनुचित विलंब अनावश्यक मुकदमेबाजी का कारण हो सकता है और आरोपित अधिकारी को अनुचित लाभ/उत्पीड़न का कारण बन सकता है।
आयोग ने कहा कि एक तरफ इस तरह की देरी दोषी अधिकारियों पर जुर्माना लगाने में मदद करती है, जबकि उन अधिकारियों की मुश्किलें लंबी खिंचती हैं जिन्हें कुछ मामलों में गलत तरीके से चार्जशीट में सूचीबद्ध किया जाता था और अंत में उन्हें छोड़ दिया जाता है। आयोग ने कहा कि जांच अधिकारी नियुक्त होने के छह महीने के भीतर जांच रिपोर्ट सौंप दी जानी चाहिए। अगर बहुत जरूरत पड़े तो एक महीने का अतिरिक्त समय लिया जा सकता है।