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केवल 10 फीसदी ई-कचरे की ही रीसाइक्लिंग कर पाता है देश, पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बनकर उभर रहा ये कचरा

Tue, 20 Apr 2021 12:28 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार 10.14 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा का प्रति वर्ष उत्पादन करने लगा है देश, लेकिन रीसाइकिल-रीयूज की क्षमता अभी भी काफी पीछे
  • केंद्र के निर्देशों के अनुसार कंपनियों को ई-वेस्ट के प्रबंधन के उपाय करना जरूरी
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ई-कचरा - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत 2018-19 में केवल 10 फीसदी ई-कचरे की रिसाइक्लिंग कर पाता था, जबकि इसी वर्ष देश में कुल 771,215 टन का ई-वेस्ट का उत्पादन हुआ। इसके एक वर्ष पूर्व यानी 2017-18 में देश में ई-वेस्ट शोधन की क्षमता केवल 3.5 फीसदी थी। देश में ई-वस्तुओं का उपयोग तेजी के साथ बढ़ रहा है और 2019-20 में ही कुल ई-वेस्ट का उत्पादन 10 लाख 14 हजार 961 टन की सीमा को पार कर चुका है। लेकिन इनके रीयूज और रीसाइक्लिंग की क्षमता में तेज बढ़ोतरी न होने से आने वाले समय में यह देश के पर्यावरण के लिये गंभीर चुनौती बन सकता है।

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ग्रीन प्लैनेट वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े विशेषज्ञ राजेश मित्तल के अनुसार प्लास्टिक हमारे समाज के लिए उतना ही महत्वपूर्ण और उपयोगी वस्तु है, जितना कि कोई अन्य पदार्थ, लेकिन इसका उचित मात्रा में रीसाइक्लिंग न हो पाना पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बन जाती है। वैज्ञानिकों के साथ-साथ देश की सरकारें भी इस प्लास्टिक के मैनेजमेंट पर लगातार ध्यान दे रही हैं और इसी का परिणाम है कि अब ई-कचरे और प्लास्टिक का भारी मात्रा में रीसाइक्लिंग और रियूज़ शुरू हो गया है।

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चुनौती

इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती ई-कचरे के संकलन की है। मोबाइल, कम्प्यूटर, टीवी, घरेलू सामान और लैपटॉप जैसे बड़े उपकरणों का संकलन और रीसाइकिल-रीयूज आसान होता है, जबकि खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग में लगे प्लास्टिक को एकत्र करना मुश्किल होता है। विशेषकर उन खाद्य पदार्थों की पैकिंग जो बहुत छोटे-छोटे पैकेट्स में होती है, उनका रीसाइकिल-रीयूज करना बहुत कठिन होता है।

जनजागरूकता ही उपाय

विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस समस्या का सही समाधान लोगों को जागरूक करने में है। अगर कॉलोनियों से लेकर बीच पर घूमने जाने वाले लोगों को ई-कचरे या प्लास्टिक वेस्ट को सही जगह पर डालने के लिए प्रेरित किया जा सके, तो यह बड़ी समस्या आसानी से सुलझ सकती है और पर्यावरण की बड़ी परेशानी दूर हो सकती है।

ई-वेस्ट के प्रति लोगों की इस जागरूकता की आवश्यकता को समझते हुए ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रद्योगिकी मंत्रालय के तत्त्वावधान में आरएलजी इंडिया ने ‘क्लीन टू ग्रीन ऑन व्हील्स कैम्पेन’ लांच किया है। इसमें अगले एक वर्ष भर में देश के 110 शहरों और 300 से ज्यादा कस्बों में पहुंचकर समाज के हर वर्ग से मिलकर ई-वेस्ट को सही जगह पर डालने के लिए जागरूक किया जायेगा। इसमें समाज के हर वर्ग को साथ लेने की कोशिश की जाएगी।
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