चुनौती
इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती ई-कचरे के संकलन की है। मोबाइल, कम्प्यूटर, टीवी, घरेलू सामान और लैपटॉप जैसे बड़े उपकरणों का संकलन और रीसाइकिल-रीयूज आसान होता है, जबकि खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग में लगे प्लास्टिक को एकत्र करना मुश्किल होता है। विशेषकर उन खाद्य पदार्थों की पैकिंग जो बहुत छोटे-छोटे पैकेट्स में होती है, उनका रीसाइकिल-रीयूज करना बहुत कठिन होता है।
जनजागरूकता ही उपाय
विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस समस्या का सही समाधान लोगों को जागरूक करने में है। अगर कॉलोनियों से लेकर बीच पर घूमने जाने वाले लोगों को ई-कचरे या प्लास्टिक वेस्ट को सही जगह पर डालने के लिए प्रेरित किया जा सके, तो यह बड़ी समस्या आसानी से सुलझ सकती है और पर्यावरण की बड़ी परेशानी दूर हो सकती है।
ई-वेस्ट के प्रति लोगों की इस जागरूकता की आवश्यकता को समझते हुए ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रद्योगिकी मंत्रालय के तत्त्वावधान में आरएलजी इंडिया ने ‘क्लीन टू ग्रीन ऑन व्हील्स कैम्पेन’ लांच किया है। इसमें अगले एक वर्ष भर में देश के 110 शहरों और 300 से ज्यादा कस्बों में पहुंचकर समाज के हर वर्ग से मिलकर ई-वेस्ट को सही जगह पर डालने के लिए जागरूक किया जायेगा। इसमें समाज के हर वर्ग को साथ लेने की कोशिश की जाएगी।