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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का दावा, देश भर के बाल गृहों का सोशल ऑडिट शुरू      

Sun, 12 Aug 2018 08:31 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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maneka gandhi
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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कहा है कि वह महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए राज्यों में सुविधा, उचित देखभाल और पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित करने में मदद करेगा। डब्ल्यूसीडी मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में मंत्री श्रीमती मेनका गांधी ने कहा कि मुजफ्फपुर और देवरिया बालगृह मामले के बाद अब देश भर में राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर बाल संरक्षण संस्थान (शेल्टर होम्स) चलाने चाहिए।

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संसदीय समिति की अध्यक्षता श्रीमती मेनका गांधी ने की। उन्होंने कहा कि मुजफ्फपुर और देवरिया का मामले के बाद डब्ल्यूसीडी मंत्रालय ने एनसीपीसीआर के सहयोग से  देश भर के बाल संरक्षण गृहों का सामाजिक लेखा परीक्षा कराया जा रहा है। 3000 गृहों का सोशल ऑडिट  पूरा हो चुका है, और मानदंडों का पालन न करने पर 40 से अधिक गृह बंद करा दिए गए हैं।      

मेनका ने कहा कि देश भर में सीसीआई के लिए राज्य सरकार जमीन देती है। शेल्टर होम्स राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर तगड़ी निगेहबानी में चलाने होंगे। डब्ल्यूसीडी मंत्री ने कहा कि हमारी लगातार यह कोशिश है कि देश भर के सीसीआई जे जे अधिनियम 2015 के अनुसार देखभाल के लिए मानकों का पालन करें।      
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2016 में मंत्रालय ने चाइल्ड इंडिया फाउंडेशन के साथ मिलकर सीसीआई पर एक शोध किया। इंडिया फांउडेशन और एनसीपीसीआर के इस अध्ययन के परिणामस्वरूप 9000 से अधिक सीसीआई गृहों को चिन्हित किया गया। इनमें से केवल 32 फीसदी यानी 3071 ही जे जे अधिनियम के तहत पंजीकृत थे। इसके लिए डब्ल्यूसीडी मंत्रालय ने इन सीसीआई गृहों के पंजीकरण के लिए एक अभियान भी चलाया था। नतीजतन इन सीसीआई में से 7109 गृह 31 दिसंबर 2017 तक पंजीकृत हुए थे जबकि 401 प्रक्रिया के तहत पंजीकृरण केलिए लाइन में थे।    
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बैठक में सांसदों से अपने इलाकों में चल रहे होम्स के संचालन में निरंतर जानकारी रखने और मंत्रालय से समन्वय करने पर भी सहमति बनी।    

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