कोरोना वायरस महामारी के दौरान आवागमन के लिए लोग अपने व्यक्तिगत वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे देखते हुए केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एचयूए) ने राज्यों को सलाह दी है कि वे कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए साइकिल की तरह गैर-मोटर चालित वाहनों को बढ़ावा दें और उन्हें पुनर्जीवित करें।
मंत्रालय ने उन्हें सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों में कैशलेस प्रौद्योगिकी को लागू करने के लिए भी कहा है। इसके लिए मंत्रालय ने विश्व के उन शहरों का उदाहरण दिया जिन्होंने कोविड-19 संकट के मद्देनजर गैर-मोटर चालित परिवहनों को बढ़ावा दिया। मंत्रालय ने कहा कि न्यूयॉर्क ने साइकलिस्ट्स के लिए 65 किलोमीटर की नई लेन बनाई है और ऑकलैंड ने 10 प्रतिशत सड़कों को मोटर वाहनों के लिए बंद कर दिया है।
इसके अलावा कोलंबिया के बोगोट में रात भर में 76 किमी साइकलिंग लेन बनाई गई। इसी तरह शुक्रवार को राज्यों और मेट्रो रेल कंपनियों को सलाह देते हुए एचयूए सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने कहा कि गैर-मोटर चालित परिवहन प्रणालियों को पूरे भारत में प्रोत्साहित और पुनर्जीवित किया जाना चाहिए। सरकारी एडवाइजरी में कहा गया है, ‘चूंकि अधिकांश शहरी यात्राएं पांच किलोमीटर से कम दूरी पर होती हैं, ऐसे में गैर-मोटर चालित परिवहनों को देश में पैदा हुई कोविड-19 स्थिति में लागू करने का सही अवसर मिल जाता है। इसमें कम लागत, कम मानव संसाधन की आवश्यकता होती है, इसे आसानी से लागू किया जा सकता है और यह पर्यावरण के अनुकूल भी है।’
सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के लिए, मंत्रालय ने लघु (छह महीने), मध्यम (एक वर्ष) और दीर्घकालिक (एक से तीन वर्ष) उपायों के साथ तीन- आयामी रणनीति का सुझाव दिया है। इसमें कहा गया है कि यात्रियों के विश्वास के साथ सार्वजनिक परिवहन को फिर से शुरू किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि यह जरूरी है कि सार्वजनिक परिवहन के जरिए संक्रमण के प्रसार पर अंकुश लगाया जाए। इसके लिए स्वच्छता, रोकथाम और सामाजिक दूरी के उपायों को अपनाया जाना चाहिए। मंत्रालय ने कहा, ‘भीम, फोन पे, गूगल पे, पेटीएम और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड जैसे टचलेस सिस्टम, सार्वजनिक प्रणालियों के संचालन में मानवीय संपर्क को कम कर देंगे।’
भारत के 18 प्रमुख शहरों में 700 किमी मेट्रो रोल का परिचालन किया जाता है और 11 शहरों में लगभग 450 किमी बस रैपिड ट्रांजिट नेटवर्क का परिचालन है, जिसके जरिए रोजाना 10 मिलियन (एक करोड़) को लाया- ले जाया जाता है। यह क्षमता कुछ समय के लिए कम हो सकती है क्योंकि यात्री कोरोना के डर से इनका इस्तेमाल करने से डरेंगे। मंत्रालय ने कहा, ‘सामाजिक दूरी का अभ्यास किए जाने के कारण, उनकी क्षमता 25 से 50 प्रतिशत उपयोग की जाएगी। ऐसे में मांग और आपूर्ति में आए इस तरह के नाटकीय और गतिशील परिवर्तन में आवागमन के वैकल्पिक साधनों के साथ सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों को पूरक बनाने की आवश्यकता होगी।’