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निजता नीति को लेकर केंद्र सरकार ने व्हाट्सएप पर लगाया भेदभाव का आरोप

Mon, 25 Jan 2021 10:44 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया कि व्हाट्सएप द्वारा निजता नीति को लेकर भारतीय व यूरोपीय उपयोगकर्ताओं के साथ अलग-अलग व्यवहार उसके लिए चिंता का विषय है और वह इस मामले पर गौर कर रही है।

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केंद्र सरकार ने उच्च न्यायालय से कहा कि यह भी चिंता की बात है कि सोशल नेटवर्किंग मंच व्हाट्सएप पर भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए ‘एकतरफा’ तरीके से निजता नीति में बदलाव किया जा रहा है। अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल चेतन शर्मा ने सरकार की इस राय से न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की अदालत को अवगत कराया जो फेसबुक के स्वामित्व वालेव्हाट्सएप द्वारा लाई गई निजता नीति के खिलाफ एक वकील द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

जब सुनवाई जब शुरू हुई तो अदालत ने 18 जनवरी की अपनी बात दोहराई जिसमें कहा गया था किव्हाट्सएप निजी ऐप है और वह वैकल्पिक है कि आप उसे डाउनलोड करें या नहीं। अदालत ने कहा कि इसे डाउनलोड करना अनिवार्य नहीं है। अन्य ऐप के भी उपयोगकर्ता की सूचना अन्य से साझा करने के नियम और शर्ते हैं। अदालत ने पूछा कि याचिकाकर्ता क्यों व्हाट्सएप की नीति को चुनौती दे रहा है?
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अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि निजी डाटा सुरक्षा विधेयक संसद में विचाराधीन है और याचिका में जिन मुद्दों को उठाया गया है उन पर सरकार विचार कर रही है। सुनवाई के दौरान शर्मा ने अदालत से कहा कि भारतीय उपयोगकर्ताओं को फेसबुक की अन्य कंपनियों के साथ डाटा साझा करने के संबंध में विकल्प नहीं देना, प्रथमदृष्टया ऐसा लगता है किव्हाट्सएप उपयोगकर्ताओं के साथ ‘स्वीकार करो या सेवा नहीं देंगे’ की नीति पर चल रहा है।

उन्होंने कहा कि जहां तक सरकार की चिंता की बात है तो व्हाइट्सएप द्वारा यूरोपीय उपयोगकर्ताओं के समक्ष पेश की जा रही निजता नीति में खासतौर पर फेसबुक के साथ कंपनी के इस्तेमाल के लिए डाटा को साझा करने पर रोक है जबकि यह धारा भारतीय नागरिकों के समक्ष पेश की जा रही निजता नीति में शामिल नहीं है जोव्हाट्सएप उपयोगकर्ताओं का बड़ा हिस्सा है।

शर्मा ने अदालत में कहा कि यह अलग तरह का बर्ताव सरकार के लिए चिंता का विषय है। सरकार के लिए यह भी चिंता का विषय है कि भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए निजता नीति एकतरफ तरीके से बदली जा रही है।

उन्होंने कहा कि व्हाट्सएप द्वारा उपयोकर्ताओं को समझौते के लिए मजबूर करने का सामाजिक प्रभाव पड़ सकता जिससे सूचना की निजता एवं सूचना सुरक्षा के हित प्रभावित हो सकते हैं। शर्मा ने कहा कि सरकार पहले ही इस मामले को देख रही है औरव्हाट्सएप से कुछ जानकारी लेने के लिये संपर्क किया गया है।

व्हाट्सऐप की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि पत्र प्राप्त हुआ है और जवाब दिया जाएगा। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई एक मार्च के लिए सूचीबद्ध कर दिया। उल्लेखनीय है कि एक वकील ने याचिका दायर करव्हाट्सएप की निजता नीति को चुनौती देते हुए इसे उपयोगकर्ता के संविधान में प्रदत्त निजता के अधिक का उल्लंघन करार दिया है।

याचिका में दावा किया गया है किव्हाट्सएप की नयी निजता नीति से उपयोगकर्ता की पूरी ऑनलाइन गतिविधि पर कंपनी की बिना सरकार की देखरेख नजर रहेगी। नई नीति में उपयोगकर्ता या तो उसे स्वीकार कर सकता है या ऐप का इस्तेमाल बंद कर सकता है, उसके पास फेसबुक स्वामित्व वाली कंपनी द्वारा तीसरे पक्ष से डाटा साझा नहीं करने का विकल्प चुनते हुए ऐप का इस्तेमाल करने का विकल्प नहीं है।

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