दुनियाभर में मशहूर हो चुके ऑनलाइन गेम पबजी पर शुक्रवार को मुंबई हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंद्राजोग और जस्टिस एन एम जामदर की बेंच ने सरकार को गेम की सामग्री जांचने और इसके आपत्तिजनक पाए जाने पर सेवा प्रदाता को इसे प्रतिबंधित करने के निर्देश जारी करने को कहा है। मुंबई हाईकोर्ट ने ये निर्देश बच्चों को स्कूलों में पबजी खेलने से रोकने के लिए दायर जनहित याचिका की सुनवाई पर दिए हैं।
याचिका के पक्ष में वकील तनवीर निजाम ने बेंच के समक्ष पबजी को सभी स्कूलों में प्रतिबंधित करने का तर्क रखा था। इस पर बेंच ने कहा ‘स्कूलों को गेम बैन करने को कैसे कहा जाए, क्योंकि स्कूल तो कहेंगे कि उन्होंने इसे पहले से ही प्रतिबंधित कर रखा है। अगर बच्चों के अभिभावक ही ऐसे गेम खेलने की इजाजत दे रहे हैं तो इसमें स्कूल क्या करेंगे?’ आपको बता दें कि इस जनहित याचिका में कहा गया था कि बच्चे और वयस्क पबजी के आदी बन रहे हैं और यह खेल हिंसा और आक्रामकता को बढ़ावा देने वाला है।
नेपाल ने लगाया पबजी पर प्रतिबंध
नेपाल ने पबजी को प्रतिबंधित कर दिया है। नेपाल टेलिकम्युनिकेशन अथॉरिटी (एनटीए) के उप निदेशक संदीप अधिकारी ने कहा, ‘यह खेल बच्चों और किशोरों के लिए लत बन रहा था और इसका उन पर बुरा असर पड़ने लगा है।’ अधिकारी ने बताया, यह प्रतिबंध बृहस्पतिवार 11 अप्रैल से ही लागू हो गया है। सभी इंटरनेट प्रोवाइडर्स, मोबाइल ऑपरेटर्स और नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर्स को गेम की स्ट्रीमिंग ब्लॉक करने के निर्द्रेश दे दिए हैं।
हालांकि नेपाल ने कहा है कि फिलहाल गेम से जुड़ी कोई घटनाएं सामने नहीं आई हैं, लेकिन बच्चों के अभिभावकों ने चिंता जाहिर की थी। बता दें कि इस ऑनलाइन गेम में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को खुद को जिंदा रखने और गेम जीतने के लिए दूसरों को मारना पड़ता है।
भारत में भी कुछ जगह पर रोक
नेपाल से पहले भारत में भी गुजरात के राजकोट में कॉलेज के 10 छात्रों को ऑनलाइन गेम पबजी खेलने पर गिरफ्तार किया गया था। गुजरात के सूरत जिले में भी इस इस गेम पर बैन लगाया गया था। जम्मू-कश्मीर में भी इस पर प्रतिबंध लगाया गया है।