केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि चारधाम राजमार्ग परियोजना और हाल ही में उत्तराखंड के चमोली में आई त्रासदी के बीच कोई संबंध नहीं है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने जस्टिस रोहिंग्टन एफ नारीमन की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि कोर्ट द्वारा नियुक्त उच्च अधिकार प्राप्त समिति ने हाल में ही उत्तराखंड में आई त्रासदी के लिए चार धाम परियोजना को जिम्मेदार ठहराया है, वह सही नहीं है।
अटॉर्नी जनरल ने कहा, समिति के चेयरमैन रवि चोपड़ा ने सरकार को पत्र लिखकर धौलीगंगा नदी में आई बाढ़ को चारधाम राजमार्ग परियोजना के तहत सड़क चौड़ीकरण से जोड़ा है, जो गैरजरूरी था। कमेटी का यह कथन गलत है।
अटॉर्नी जनरल ने कहा, रक्षा मंत्रालय इस संबंध में हलफनामा दाखिल करना चाहता है। जिस पर पीठ ने कमेटी की रिपोर्ट पर मंत्रालय को दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
गत जनवरी में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने हलफनामा दायर कर सुप्रीम कोर्ट से चार धाम परियोजना के लिए 5.5 मीटर की जगह 10-मीटर सड़क की चौड़ाई का समर्थन करने वाली उच्च अधिकार प्राप्त समिति के बहुमत के दृष्टिकोण को स्वीकार करने के आग्रह किया था।
गौरतलब है कि चार धाम परियोजना का मकसद पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के चार तीर्थस्थलों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ को एक-दूसरे से जोड़ना है। इस परियोजना के पूरा हो जाने के बाद हर मौसम में तीर्थयात्री चार धाम की यात्रा कर सकेंगे।
इस परियोजना के तहत 889 किलोमीटर सड़क को चौड़ा किया जाना है। करीब 1200 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत अब तक 400 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण किया जा चुका है। जानकारी के मुताबिक, अब तक 26 हजार से अधिक पेड़ों को काटा जा चुका है।