केंद्र सरकार ने डिजिटल मीडिया के लिए जारी नए दिशा-निर्देशों को और स्पष्ट करते हुए कहा कि आपात स्थिति में इंटरनेट की सामग्री को ब्लॉक करने का प्रावधान 2009 से ही है, यह हाल में जारी नहीं किया गया है। इन्हें केवल नए दिशा-निर्देशों में समाहित किया है। इनका स्वरूप स्थायी और यथावत है।
दरअसल, सरकार ने यह स्पष्टीकरण तब दिया है, जब नए नियमों के बाद यह कहा जा रहा है कि अब प्रकाशकों के लिए सुनवाई का कोई मौका ही नहीं बचा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 डिजिटल मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र पर समाचार प्रकाशकों और ओवर द टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म के लिए एक संस्थागत ढांचा प्रदान करते हैं।
नियमों के भाग तीन के तहत नियम 16 के बारे में भ्रामक जानकारी दी जा रही है। इसमें कहा गया है कि सामग्री के आपातकालीन प्रकृति के मामले में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव अंतरिम रोक का निर्देश जारी कर सकते है। मंत्रालय ने साफ किया है कि यह प्रावधान ठीक उसी तरह से हैं जैसा कि पिछले 11 सालों से सूचना प्रौद्योगिकी (प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों के लिए सार्वजनिक उपयोग द्वारा अवरोधन) के लिए सचिव इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा प्रयोग किया जा रहा है।
चूंकि सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया नैतिकता संहिता) नियमों के भाग तीन में, 2021 को सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रशासित किया जाएगा, यही कारण है कि सचिव की योग्यता का संदर्भ सचिव, सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है। यह कोई नया प्रावधान नहीं है।
फर्जी खबरों की चिंताओं के समाधान के लिए हैं नए नियम: नैसकॉम
सूचना और प्रौद्योगिकी के निकाय नैसकॉम ने शुक्रवार को सोशल मीडिया, ओटीटी प्लेटफार्म और डिजिटल मीडिया के लिए जारी नए नियमों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि इनका उद्देश्य शिकायत निवारण, फर्जी समाचार, ऑनलाइन सुरक्षा जैसी चिंताओं का समाधान करना है। इसे सुनिश्चित करने के लिए सही क्रियान्वयन की भी आवश्यकता होगी, ताकि वह प्लेटफार्म के लिए सही साबित हो, खराब न हो।