मेहता ने जेल नियमों का हवाला देते हुए कहा, अगर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) आती है तो एक यही अंतिम कानूनी उपचार है जो फांसी टाल सकता है। दिल्ली कारागार नियमावली 2018 के मुताबिक, अगर किसी एक अपराधी की एसएलपी लंबित हो तो बाकी के दोषियों की फांसी भी स्थगित हो जाएगी। हालांकि, यह नियम दया याचिका के संबंध में लागू नहीं होता है। निचली अदालत ने इसी को आधार बनाते हुए सभी दोषियों की फांसी स्थगित कर दी।
चारों दोषियों की अभी यह है स्थिति
- मुकेश सिंह और विनय शर्मा के सभी विकल्प समाप्त।
- अक्षय सिंह की सिर्फ दया याचिका राष्ट्रपति के पास विचाराधीन।
- पवन गुप्ता के पास सुधारात्मक और दया याचिका का विकल्प।