केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्यमंत्री महेश शर्मा
केंद्र सरकार रविवार को भारत की पहली चिकित्सा पर्यटन एवं कल्याण नीति जारी करेगी। चिकित्सा पर्यटन और पारंपरिक भारतीय कल्याण कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य के साथ सरकार ने अस्पतालों और कल्याण केंद्रों को मंत्रालय की वेबसाइट पर पंजीकरण कराने और उन खर्चों को भी बताने करने का निर्णय लिया है, जिस पर उनके द्वारा प्रक्रिया या पैकेज पेश किए जाएंगे।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक सरकार की इस नीति का शुभारंभ राष्ट्रीय योग दिवस पर होगा।
केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्यमंत्री महेश शर्मा ने कहा कि भारत के पास स्वास्थ्य सेवाएं किफायती कीमतों में मुहैया कराने में विश्व नेता बनने की क्षमता है। अधिक पारदर्शिता लाने के लिए हमारा उद्देश्य इस नीति के जरिए अस्पतालों और कल्याण केन्द्रों को पंजीकृत करने का है। इससे वे अपना रेट कार्ड, जो सुविधाएं वह दे रहे हैं उसका ब्यौरा और सुविधाओं का सक्सेस रेट जिससे पर्यटक यह चुन सके कि उसके लिए कौन सी सुविधा ज्यादा बेहतर है, बता सकते हैं।
चिकित्सा पर्यटन और कल्याण बोर्ड (एमटीडब्ल्यूबी) 2016 में एनडीए सरकार द्वारा गठित किया गया था जिसकी अध्यक्षता महेश शर्मा करते हैं। एमटीडब्ल्यूबी ने यह भी प्रस्ताव रखा कि चिकित्सा सहायता प्रदाताओं को भी स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर पर्यटन मंत्रालय द्वारा पंजीकृत और प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
सरकार की कोशिश से नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाईडर्स (एनएबीएच) ने पारंपरिक कल्याण केंद्रों द्वारा मुहैया कराई जाने वाली सुविधाओं आयुर्वेद, योगा और नेचुरोपैथी, यूनानी, सिद्धा और होमियोपैथी को भी मान्यता देना शुरू कर दिया है।