तीन नए कृषि कानूनों पर आंदोलनरत किसानों से सरकार जल्द ही वार्ता करेगी। वार्ता के दौरान सरकार की कोशिश न्यूनतम समर्थन मूल्य और मंडियों पर किसानों के संदेहों को दूर करने पर होगा। गौरतलब है कि किसान आंदोलन का प्रभाव बढ़ने के बाद सरकार चिंतित है। हालात संभलाने के लिए रविवार को भाजपा अध्यक्ष, रक्षा मंत्री, कृषि मंत्री के साथ मैराथन बैठक के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को भी कृषि मंत्री के साथ लंबी बैठक की।
सूत्रों ने कहा कि सरकार चाहती है कि आंदोलनरत किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल बने, जिससे बातचीत की जा सके। इस आशय का संदेश कुछ किसान नेताओं तक पहुंचा दिया गया है। सरकार की योजना इस वार्ता के दौरान किसानों को एमएसपी के तहत खरीद प्रक्रिया बंद न होने और मंडियों को बनाए रखने का आश्वासन दिया जाएगा। सरकार की योजना इस दौरान नए कृषि कानूनों से किसानों को होने वाले लाभ की भी जानकारी दी जाएगी।
आंदोलन की आग पंजाब-हरियाणा में ज्यादा क्यों?
इस आंदोलन में मुख्य रूप से पंजाब-हरियाणा के किसान ज्यादा हैं। दरअसल इन्हीं राज्यों में एमएसपी के तहत गेंहूं और धान की सर्वाधिक सरकारी खरीद होती है। इसके अलावा इन्हीं राज्यों में मंडी व्यवस्था सर्वाधिक मजबूत है। किसानों को आशंका है कि नए कानून के कारण सरकार धीरे-धीरे एमएसपी के तहत सरकारी खरीद बंद कर देगी। खाद्यान्न स्टॉक करने और अनाज खरीदने की आजादी मिलने के बाद मंडियां धीरे-धीरे अस्तित्व खो देंगी। इससे अंतत: इन्हीं राज्यों के किसानों को घाटा होगा।
अचानक चिंतित क्यों हुई सरकार?
सरकार किसान आंदोलन के कारण अचानक चिंतित हुई है। खुद गृह मंत्री अमित शाह ने माना है कि किसानों का आंदोलन राजनीतिक नहीं है। सरकार के एक केंद्रीय मंत्री का कहना है कि किसान अफवाह के शिकार हुए हैं। मोदी सरकार के कार्यकाल में एमएसपी के तहत सरकारी खरीद में कई गुना इजाफा हुआ है। सरकार किसानों को अपना अनाज बेचने का मंडी के अतिरिक्त अन्य विकल्प दे रही है। सरकार को उम्मीद है कि वार्ता के बाद वह किसानों को मनाने में कामयाब हो जाएगी।