अभी केन्द्र सरकार के पास ऐसा कोई मैकेनिज्म नहीं है, जिससे वह हर साल युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में मिलने वाले रोजगार के अवसर, उसके ट्रेंड और गैर रोजगार प्राप्त युवाओं की सटीक जानकारी दे सके। लेकिन केन्द्र सरकार ने पहल शुरू कर दी है और केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार सचिव शंकर अग्रवाल का कहना है कि दो साल बाद रोजगार ट्रेंड को लेकर सरकार के पास हर महीने की हर तररह की जानकारी उपलब्ध रहेगी।
केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार सचिव के अनुसार अभी केवल यही कहा जा सकता है कि हर साल एक करोड़ युवा रोजगार के क्षेत्र में आते हैं। इसमें संगठित और असंगठित क्षेत्र दोनों शामिल हैं। लेकिन यह नहीं बताया जा सकता है कि इनमें कितने युवाओं को हर साल किस क्षेत्र में और उनकी योग्यता की तुलना में किस स्तर का रोजगार मिलता है। इतना ही नहीं केन्द्र सरकार के पास इस तरह का कोई कारगर मैकेनिज्म नहीं है, जिससे वह हर साल विभिन्न क्षेत्रों में लोगों की छूटने वाली नौकरियों का डेटा दे सके या रोजगार का सटीक ट्रेंड बता पाए।
श्रम एवं रोजगार सचिव के अनुसार सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। ऐसा अनुमान है कि दो साल में हम रोजगार इंडेक्स को दे सकेंगे। हर महीने के रोजगार के ट्रेंड के बारे में जान सकेंगे और इस जानकारी के आधार पर युवाओं को शिक्षित प्रशिक्षित करने की कारगर योजनाएं बनाई जा सकेंगी। यह बताया जा सकेगा कि किस तरह से बाजार, उद्योग और रोजगार का क्षेत्र बदल रहा है और कैसी योग्यता के लोगों की मांग है। आने वाले समय में हमें कितने इंजीनियर, एमबीए, टेक्नीशियन या किस तरह के अन्य प्रफेशनल चाहिए।