किसानों की आय को दोगुना करने के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत नौ राज्यों में 22 कलस्टर बनाए जाएंगे। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को एक वर्चुअल कार्यक्रम में, राष्ट्रीय बांस मिशन (एनबीएम) के लिए ‘लोगो’ (प्रतीक चिन्ह) को भी जारी किया।
केंद्र सरकार की मंशा किसानों को बांस के उत्पादन के लिए प्रेरित करके बांस के सामान और बांस के निर्यात को बढ़ावा देना है। दुनिया में बांस उत्पादन में अग्रणी होने के बावजूद भारत का निर्यात न के बराबर है। देश में बांस की खेती के प्रसार को देखते हुए मोदी सरकार 2014 से इस पर सतत कार्य कर रही है।
इसके लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2017 में भारतीय वन अधिनियम 1927 का संशोधन करके बांस को पेड़ों की श्रेणी से हटा दिया है। उन्होंने कहा कि नतीजतन, अब कोई भी बांस और उसके उत्पादों में खेती और व्यवसाय कर सकता है।
बांस को बढ़ावा देने के लिए बांस की आयात नीति को भी बदला गया। इसका मकसद स्थानीय स्तर पर बांस उद्योग से जुड़े लोगों की तरक्की, संरक्षण और बांस के निर्यात के माध्यम से किसान की आय को बढ़ाना है। बांस के क्लस्टर (समूहों) की स्थापना मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, असम, नागालैंड, त्रिपुरा, उत्तराखंड और कर्नाटक में की जाएगी।
तोमर ने कलस्टर का उदघाटन करते हुए कहा कि बांस का उपयोग भारत में एक प्राचीन परंपरा रही है और अब इसे आधुनिक तकनीक के साथ समर्थन दिया जा रहा है। बांस उद्योग के लिए युवाओं को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय बांस मिशन का आधिकारिक लोगो तैयार करने के लिए माई-जीओवी प्लेटफॉर्म के जरिये एक ऑनलाइन प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। देशभर से मिली 2033 प्रविष्टियों में से तेलंगाना के साई राम गौड एडिगी द्वारा विकसित डिजाइन को चुना गया व उन्हें नगद पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
बांस मिशन के लोगो में बांस की छवि भारत के विभिन्न हिस्सों में बांस की खेती को चित्रित करती है। लोगो के चारों ओर औद्योगिक पहिया, बांस क्षेत्र के औद्योगीकरण के महत्व को दर्शाता है। लोगो में सुनहरे पीले व हरे रंग का संयोजन दर्शाता है कि बांस ‘हरा सोना’ है। आधा औद्योगिक पहिया और आधा किसान सर्कल किसानों और उद्योग दोनों के लिए बांस के महत्व को दर्शाता है।