वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार कर संग्रह में जबर्दस्त वृद्धि और लक्ष्य से अधिक विनिवेश को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है इसलिए वित्तीय घाटे को जीडीपी के 3.3 फीसदी तक ही सीमित रखने का मन बना चुकी है। दो दिवसीय सरकार को पूरा भरोसा है कि 2018-19 के बजट के लिए अनुमानित 7.2 से 7.5 फीसदी विकास दर भी अधिक रहेगी।
तीन घंटे की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि आयकर संग्रह में जबर्दस्त वृद्धि हुई है और उम्मीद है कि यह वृद्धि बजटीय लक्ष्य से अधिक रहेगी। उन्होंने कहा कि महंगाई बहुत हद तक नियंत्रण में है। चालू वित्त वर्ष के लिए बजट खर्च का 44 फीसदी खर्च किया जा चुका है और सरकार इसमें कटौती किए बिना 31 मार्च 2019 तक पूरी राशि खर्च करेगी। उच्च विकास दर के लिए बजट आवंटन की 100 फीसदी राशि को खर्च करना जरूरी है।
राजस्व संग्रह के बारे में उन्होंने कहा कि कालेधन के खिलाफ मुहिम, नोटबंदी और जीएसटी का प्रभाव अब कर संग्रह में वृद्धि के तौर पर देखा जा रहा है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को पूरा भरोसा है कि इस वर्ष कर संग्रह बजटीय लक्ष्य से कहीं ज्यादा होगा। अप्रत्यक्ष कर के बारे में उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) भी व्यवस्थित हो चुका है और आने वाले महीनों में जीएसटी संग्रह भी रफ्तार पकड़ने लगेगा।
अर्थव्यवस्था और वृहद आर्थिक आंकड़ों से पीएम संतुष्ट
शनिवार की बैठक में आर्थिक मामलों, राजस्व, व्यय एवं विनिवेश विभागों ने विस्तृत ब्योरा पेश किया। वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था और वृहद आर्थिक आंकड़ों से संतुष्टि जताई। राजस्व विभाग ने बताया कि सरकार ने बजट में चालू वित्त वर्ष के दौरान प्रत्यक्ष कर संग्रह 11.5 लाख करोड़ का लक्ष्य रखा था, जबकि अभी से हम इस लक्ष्य को पार कर चुके हैं। आगामी माह में जीएसटी संग्रह से हमारा अप्रत्यक्ष कर संग्रह भी बढ़ेगा।