अर्थशास्त्री डॉ. विकास कुमार सिंह के मुताबिक देश की शीर्ष 500 कंपनियों में कम से कम 100 ऐसी हैं जो दो माह से ज्यादा लॉकडाउन रहने पर ब्याज चुकाने और स्थायी खर्च उठाने में असमर्थ हैं। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकनोमी के अध्ययन के मुताबिक देश में 14 करोड़ लोगों की अप्रैल में एक पैसे आमदनी नहीं हुई।
वहीं, 45 फीसदी परिवारों की आय घटी है। करीब 6.5 लाख लोगों ने भविष्य निधि खातों से 2,700 करोड़ रुपए निकाले हैं। पहले 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान देश की अर्थव्यवस्था को रोज 32,000 करोड़ रुपये की चपत लगी। देश के 53 उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
सब्जी-फल की खेती करने वाले किसानों को काफी नुकसान हुआ है। इवेंट मैनेजमेंट, रेस्टोरेंट, होटल, पर्यटन उद्योग और एयरलाइंस अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
- 1.7 लाख करोड़ का एक पैकेज हो चुका जारी
केंद्र लॉकडाउन से सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब लोगों के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा कर चुका है। इसके तहत मुफ्त में अनाज, रसोई गैस तथा गरीब महिलाओं एवं बुजुर्गों को नकदी सहायता शामिल हैं। वहीं, रिजर्व बैंक ने भी कई नीतिगत फैसले कर राहत पहुंचाने की कोशिश की।
- कृषि क्षेत्र को प्रतिबंधों से मुक्त करने पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कृषि क्षेत्र में सुधार के उपायों पर चर्चा की। इस दौरान कृषि विपणन और किसानों को आसान संस्थागत कर्ज उपलब्ध करने पर बात हुई। साथ ही कृषि क्षेत्र को कानूनी उपायों के माध्यम से विभिन्न पाबंदियों से मुक्त करने पर जोर दिया गया। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 15 फीसदी हिस्सा कृृषि क्षेत्र का है और आधी से ज्यादा आबादी की आजीविका इससे जुड़ी है।
बैठक में फसलों के विकास में जैव प्रौद्योगिकी के प्रभाव, उत्पादकता में वृद्धि और लागत में कमी आदि के विषयों पर भी मंथन हुआ। साथ ही कृषि के आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाने के लिए रियायती कर्ज प्रवाह, प्रधानमंत्री किसान योजना के लाभार्थियों के लिए विशेष किसान कार्ड और कृषि उत्पादों के राज्य के भीतर और दूसरे राज्य में कारोबार की सुविधा आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी बात हुई।