केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह
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1985 में अस्तित्व में आए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने नवंबर 2022 तक 8.93 लाख मुकदमे सुने, इनमें से वह 8.12 लाख का निस्तारण कर चुका है। 90 फीसदी से अधिक निस्तारण दर के पीछे पिछले आठ वर्ष में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के नेतृत्व में दूर की गई अड़चनों का अहम योगदान है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कैट सदस्यों के लिए भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) में शुरू हुई दो दिवसीय कार्यशाला में यह जानकारी दी। आईआईपीए के अध्यक्ष के तौर पर जितेंद्र सिंह ने बताया कि करीब 2,000 ऐसे कानून सरकार ने खत्म किए हैं, जो आधुनिक समय में अनुपयोगी हो चुके थे। इस प्रकार की कई बाधाएं मुकदमों के तेज निस्तारण के लिए दूर की गई हैं।
इससे न्यायपालिका पर मुकदमों का बोझ घटाने में मदद मिली। उन्होंने कहा, कैट का गठन केवल सेवा-नियमों से जुड़े मामलों को सुनने के लिए हुआ था, जिनमें बेहद विशेषज्ञता की जरूरत होती है। वहीं, हाई कोर्ट जिस पर पहले से अन्य मामलों का बोझ है, उसके लिए इन मामलों को जल्द निस्तारित करना संभव नहीं होता।
उन्होंने बताया कि प्रशासकीय अधिकरण हाई कोर्ट के व्यावहारिक विकल्प के रूप में काम कर रहे हैं। वे अपने क्षेत्राधिकार और कार्य प्रणाली की वजह से साधारण अदालतों से तो अलग है ही, कई तकनीक न्यायिक जटिलताओं से भी बचे हुए हैं। जितेंद्र सिंह ने सराहना कर कहा कि कैट के सदस्य ऊंची अदालतों के समान ही अपने कर्तव्य पूरे कर रहे हैं, सरकारी हस्तक्षेप से दूर हैं और इनके अध्यक्ष को हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के समान शक्तियां दी जा सकती हैं।
मुकदमे निस्तारण की दर 90 फीसदी
- 1 नवंबर 1985 को अस्तित्व में आया, 5 शाखाएं बनीं, आज 19 शाखाएं
- जम्मू में 8 जून 2020 और श्रीनगर में 23 नवंबर 2021 को नई शाखाएं बनाई गईं, दोनों काम शुरू कर चुकीं
- कुल 8,93,705 मुकदमे सुने, जिनमें 8,12,806 का निस्तारण किया, 80,899 लंबित हैं, यानी निस्तारण दर करीब 90 फीसदी