देश के आईएएस और स्टेट सिविल सर्विस के अफसरों को केंद्र सरकार 'बिजनेस' में पारंगत बनाएगी। इन अफसरों को आईआईएम विशाखापट्टनम से एमबीए कराई जाएगी। यह डिग्री प्रोग्राम 18 माह का रहेगा। एक अधिकारी की दाखिला फीस साढ़े सोलह लाख रुपये होगी। इसके अलावा उसके रहने, खाने पीने और विदेश भ्रमण आदि सहित अन्य खर्च भी वहन करने होंगे। यानी एमबीए की डिग्री 20 लाख रुपये के पार चली जाएगी। केंद्र ने आईएएस के अलावा अपने सीएसएस और सीएसएसएस के अधिकारियों को भी यह कोर्स कराने का निर्णय लिया है।
डीओपीटी की ट्रेनिंग डिविजन के मुताबिक, केंद्र सरकार सिविल सेवा के अधिकारियों को एमबीए डिग्री इन डिजिटल गवर्नेंस एंड मैनेजमेंट की पढ़ाई कराएगी। इसके लिए सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा गया है। उन्हें सीटों की संख्या के मुताबिक, अपने यहां से किसी अधिकारी का नाम इस कोर्स के लिए नामित करना होगा। दाखिला फीस इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय वहन करेगा, जबकि बाकी खर्च संबंधित कैडर कंट्रोल अथॉरिटी को देना पड़ेगा।
यह कोर्स कराने के पीछे केंद्र सरकार का मकसद है कि ऐसे अफसर तैयार किए जाएं, जो ई-गवर्नेंस को आगे बढ़ा सकें। यह डिग्री करने के बाद ये अफसर लोगों को नागरिक सशक्तिकरण, सामाजिक विकास, ग्रोथ और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के बारे में ज्यादा विस्तृत जानकारी देने में सक्षम होंगे।
इस डिग्री कोर्स में शामिल होने के लिए केंद्र एवं राज्यों के अधिकारियों के पास कम से कम पांच साल तक ग्रुप-ए सेवा में काम करने का अनुभव होना चाहिए। अधिकतम आयु 45 वर्ष हो और उनके पास 15 वर्ष तक की सेवा का अनुभव भी हो। इस डिग्री कोर्स में साढ़े चार माह की चार टर्म रहेंगी। कोर्स के चार टर्म में से 15 सप्ताह तक अधिकारी को अपनी ड्यूटी से दूर रहना होगा। उसके बाद के 57 सप्ताह के कोर्स के दौरान वह अपनी ड्यूटी पर जा सकता है।
मतलब, वह अधिकारी बाकी के कोर्स ऑनलाइन कर सकता है। इस डिग्री कोर्स को ऑन कैंपस एवं ऑनलाइन लर्निंग में बांटा गया है। अधिकारी को यह कोर्स ज्वाइन करने से पहले एक बॉंन्ड भरना होगा। अगर वह अधिकारी कोर्स को बीच में छोड़ता है तो उससे वह खर्च मांगा जा सकता है, जो सरकार ने उस पर खर्च किया है। इसमें विदेश यात्रा का खर्च भी शामिल है। जुलाई में यह कोर्स शुरू होगा।