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पुरानी पेंशन: केंद्र सरकार को दबाव में लाने के लिए 2024 तक कई बार हो सकता है 'भारत बंद', बन रही है मजबूत रणनीति

सार

'कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन' के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, सीएपीएफ में पुरानी पेंशन शुरू कराने के लिए कॉन्फेडरेशन द्वारा राष्ट्रपति, केंद्रीय गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री, गृह राज्य मंत्री और केंद्रीय गृह सचिव सहित सभी बलों के महानिदेशकों से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा गया है...
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भारत बंद - फोटो : PTI
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विस्तार
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केंद्रीय कर्मचारी संगठन, पुरानी पेंशन बहाल करने और निजीकरण को रोकने सहित अन्य मांगें पूरी कराने के लिए सरकार पर चौतरफा दबाव डालने की रणनीति बना रहे हैं। अगर उनकी यह रणनीति कामयाब रहती है तो 2024 के लोकसभा चुनाव तक कई बार 'भारत बंद' हो सकता है। केंद्रीय कर्मियों के विभिन्न संगठन, सियासतदानों के साथ मिलकर अपने आंदोलन को गति देंगे। विपक्ष को साथ लाने के प्रयास हो रहे हैं। ऑल इंडिया बैंक एंप्लाइज एसोसिएशन के महासचिव सीएच वेंकटचलम और अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ के महासचिव श्रीकुमार के अनुसार, सरकार निजीकरण की नीति पर चल रही है। यह देश हित में नहीं है। फायदे में चलने वाले सार्वजनिक उपक्रमों को बेचा जा रहा है। सरकारी विभागों में पहली जनवरी 2004 के बाद पेंशन बंद कर दी गई है। बतौर श्रीकुमार, इस आंदोलन में अब विभिन्न राज्यों के कर्मचारी संगठन भी शामिल हो रहे हैं।   

पुरानी पेंशन लागू करने को लेकर जल्द आंदोलन

देश में विभिन्न कर्मी संगठनों द्वारा 28 और 29 मार्च को भारत बंद का आह्वान किया गया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है, केंद्र सरकार जानबूझ कर सार्वजनिक उपक्रमों को बंद करने की कगार पर खड़ा कर रही है। भारतीय आयुध कारखानों के गौरवशाली इतिहास को खत्म किया जा रहा है। श्रीकुमार कहते हैं, खासतौर पर पुरानी पेंशन और निजीकरण को लेकर देश के सभी कर्मचारी संगठन एक राय रखते हैं। कांग्रेस पार्टी की राजस्थान और छत्तीसगढ़ सरकार ने पुरानी पेंशन को लागू कर दिया है। जाहिर है कि इसके बाद दूसरे राज्यों में भी इस बाबत आवाज उठने लगी हैं।

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वर्तमान में अधिकांश राज्यों के कर्मचारी संगठन, पुरानी पेंशन को लेकर आंदोलन करने की तैयारी में हैं। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के जॉइंट फोरम और अलग-अलग क्षेत्रों की स्वतंत्र श्रमिक यूनियनें, राज्यों के कर्मचारी संगठनों से बात करेंगी। सीएच वेंकटचलम ने कहा, केंद्र सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण किया जा रहा है। बैंकों के डूबे कर्ज की वसूली को तेज किया जाए। बैंक जमा पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो। पुरानी पेंशन बहाली और सेवा शुल्कों में कमी करने जैसी मांगों पर सरकार को अड़ियल रूख छोड़ना होगा। सरकारी बैंकों के निजीकरण से कुछ फायदा नहीं होगा।

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कल्याण के लिए गठित 'कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन' ने भी पुरानी पेंशन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को चेतावनी दे रखी है। कॉन्फेडरेशन के चेयरमैन पूर्व एडीजी एचआर सिंह का कहना है, देश के 20 लाख पैरामिलिट्री परिवार अपना वोट उसी को करेंगे, जो दल अर्धसैनिक बलों में पुरानी पेंशन बहाल करेगा। महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, सीएपीएफ में पुरानी पेंशन शुरू कराने के लिए कॉन्फेडरेशन द्वारा राष्ट्रपति, केंद्रीय गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री, गृह राज्य मंत्री और केंद्रीय गृह सचिव सहित सभी बलों के महानिदेशकों से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा गया है।

संयुक्त किसान मोर्चा का भारत बंद को समर्थन

सार्वजनिक क्षेत्र के राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) में भी हड़ताल का असर देखने को मिला। कर्मचारी श्रमिक संगठनों का दावा है कि निर्माण संयंत्र में 75 फीसदी कर्मचारी काम पर नहीं आए। सोमवार को केंद्र सरकार के विरोध में बैंक, बीमा, बीएसएनएल, रक्षा, पोस्ट ऑफिस, आयकर, कोयला, रक्षा, आशा, आंगनवाड़ी, मेडिकल रीप्रेजेंटेटिव, खेत, खदान, भवन निर्माण एवं दूसरे संस्थानों के कर्मी हड़ताल में शामिल हुए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने भी भारत बंद को अपना समर्थन दिया है।

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देश की 41 आयुध निर्माणियां, जो पिछले साल तक ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) के जरिए संचालित होती थीं, अब उसे भंग कर दिया गया है। संपत्तियां, कर्मचारी और प्रबंधन को सात सरकारी कंपनियों में तब्दील कर दिया गया है। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ का कहना है, देश के पांच पूर्व रक्षा मंत्रियों ने कहा था, आयुध कारखानों का निजीकरण नहीं होगा। इसके बावजूद सरकार ने इन कारखानों को कंपनियों में बदल दिया। सेना का साजो सामान अब प्राइवेट कंपनियां तैयार करेंगी। कर्मचारी संगठनों का कहना है, सरकार ने इन कारखानों को बेचने का निर्णय कर लिया है। अभी तो इन्हें कंपनी बनाया गया है, कुछ समय बाद इन्हें निजी हाथों में सौंपा जा सकता है। सरकार, किसी भी वक्त कह सकती है, ये उद्योग घाटे में चल रहे हैं, इसलिए इनका निजीकरण कर दिया जाए।

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