केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि जून 2025 के दौरान विभिन्न कंपनियों द्वारा निर्मित 185 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इनमें से 55 सैंपल केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं द्वारा और 130 सैंपल राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं द्वारा लिए गए थे।
केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं और राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं द्वारा जून 2025 में की गई जांच में सामने आया है कि देश में कई दवा नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय प्रयोगशालाओं ने 55 दवा नमूनों को गुणवत्ता की दृष्टि से अनुपयुक्त पाया, जबकि राज्य प्रयोगशालाओं ने 130 नमूनों को मानक से नीचे पाया।
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नियमित विनियामक निगरानी गतिविधि के अनुसार, गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं और नकली दवाओं की सूची मासिक आधार पर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) पोर्टल पर प्रदर्शित की जा रही है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया,जून 2025 के महीने में, केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं ने 55 औषधि नमूनों को मानक गुणवत्ता का न पाए जाने की पुष्टि की है, जबकि राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं ने 130 औषधि नमूनों को मानक से निम्न गुणवत्ता का पाया है।
दवा के नमूनों की ‘मानक गुणवत्ता के अनुपयुक्त’के रूप में पहचान, किसी एक या अन्य निर्दिष्ट गुणवत्ता मानकों पर दवा के नमूने के विफल होने के आधार पर की जाती है। अधिकारियों ने बताया कि यह विफलता सरकारी प्रयोगशाला द्वारा परीक्षण किए गए बैच के दवा उत्पादों के लिए विशिष्ट है और इससे बाज़ार में उपलब्ध अन्य दवा उत्पादों को लेकर कोई आशंका नहीं होनी चाहिए।
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इसके अलावा, जून में बिहार और दिल्ली से एक-एक दवा का नमूना तथा तेलंगाना से दो नमूनों की पहचान नकली दवा के रूप में की गई। अधिकारी ने बताया कि ये दवाएं किसी अन्य कंपनी के स्वामित्व वाले ब्रांड नाम का उपयोग करके एक अनधिकृत इकाई द्वारा निर्मित की गई थीं, और मामले की जांच चल रही है तथा संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।