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Central Civil Services: DOPT की गाइडलाइन, खाली पड़े पद होंगे सरेंडर, कैडर रिव्यू में नई पोस्ट मांगने से बचें

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 06 Oct 2022 11:24 PM IST

सार

Central Civil Services: डीओपीटी ने कैडर रिव्यू की प्रक्रिया शुरू करने से पहले विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। उनके मुताबिक ही आगामी कैडर रिव्यू होगा। पिछली कैडर समीक्षा में जो बदलाव या सुझाव दिए गए थे, क्या वे अभी तक लागू हुए हैं या नहीं, इन सब पर भी गौर करना होगा...
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Central Civil Services: Dr Jitendra Singh, Minister DOPT - फोटो : Agency (File Photo)


कैडर संख्या में बढ़ोतरी का प्रपोजल व नए ग्रेड सृजित करना, इन सबसे बचा जाए। ऐसी मांग तभी आगे बढ़ाई जाए, जब कठोर कार्यात्मक औचित्य दिखाई पड़ता हो। एडवांस तकनीक व बदलावों के चलते कोई पद अनावश्यक हो गया हो तो उस पद या सेवा का विलय करें अथवा उसे खत्म करने का प्रपोजल भेज दें।

रिपोर्ट से कोई मकसद हासिल हुआ है या नहीं

डीओपीटी ने कैडर रिव्यू की प्रक्रिया शुरू करने से पहले विस्तृत गाइडलाइन जारी की हैं। उनके मुताबिक ही आगामी कैडर रिव्यू होगा। उसमें पिछले कैडर रिव्यू की रिपोर्ट को सामने रखा जाएगा। उस रिपोर्ट से कोई मकसद हासिल हुआ है या नहीं, ये भी देखना होगा। सेवा बढ़ोतरी की मांग और वास्तविक कार्य स्थिति का विश्लेषण करना पड़ेगा। पिछली कैडर समीक्षा में जो बदलाव या सुझाव दिए गए थे, क्या वे अभी तक लागू हुए हैं या नहीं, इन सब पर भी गौर करना होगा। इस प्रक्रिया में ग्रुप बी व सी के कैडर रिव्यू का स्टे्टस और एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट को भी ध्यान में रखना पड़ेगा। कैडर रिव्यू से पहले संबंधित विभाग या सेवा का संगठन चार्ट, पद और वेतन आदि पर गौर करना जरूरी है। अगर किसी विभाग में कोई पद अपग्रेड हुआ है तो उनकी पहचान करनी होगी। जो कैडर रिव्यू प्रपोजल तैयार किया जाए, उसे कमेटी ऑफ सेक्रेटरी के नोट की तरह भेजें।

सर्विस एसोसिएशन का पक्ष अवश्य डालें

इतना ही नहीं, जिस सेवा का कैडर रिव्यू हो रहा है, उसमें वहां की सर्विस एसोसिएशन का पक्ष अवश्य डाला जाए। उसमें भर्ती योजना, स्किल गैप, कैडर ढांचा, करियर प्रोग्रेशन वित्तीय निहितार्थ मौजूदा मैनपावर, कार्य और रणनीतिक जरुरतों की झलक दिखाई दे। खाली पदों का विश्लेषण करें। यह देखें कि आज उनकी कितनी जरूरत है। क्या उनके बिना काम चल सकता है। उन पदों का कोई नया विकल्प दिख रहा है, ये भी देखना चाहिए। केवल पद भरने की मंशा से कैडर रिव्यू में नए पदों की सिफारिश न करें। जरूरत के पदों को ही नियमित करने पर ध्यान दें। अगर कुछ ऐसे पद हैं जो लंबे समय से खाली रहे हैं तो उन्हें सरेंडर कर दिया जाए। अतिरिक्त पदों के सृजन की पहचान के लिए ड्यूटी को देखना होगा। ऐसे में पद से संबंधित जिम्मेदार जांचनी होगी। वहां यह देखें कि इतने पदों की जरूरत है या नहीं। अगर कोई नया पद चाहते हैं तो उसे उक्त आधार पर न्यायसंगत ठहराने का प्रयास करें।

नए ग्रेड सृजित करना, ऐसी मांग रखने से बचें

डीओपीटी ने सेंट्रल सिविल सर्विस के कैडर रिव्यू के लिए समेकित 'कंसोलिडेटिड' गाइडलाइन जारी की हैं। कैडर रिव्यू प्रपोजल तैयार करते समय इनका ध्यान रखना होगा। किसी भी पद पर अगर थोड़ा बहुत काम बढ़ जाए तो उसे सामान्य तौर पर लिया जाए। कैडर रिव्यू में इसे अतिरिक्त मैनपावर की मांग वाले कॉलम में न डाला जाए। जहां पर सुस्पष्ट तरीके से मैनपावर की कमी हो, केवल वहीं पर पदों की बढ़ोतरी की मांग रखी जाए। कैडर संख्या में बढ़ोतरी का प्रपोजल व नए ग्रेड सृजित करना, ऐसी मांग रखने से बचा जाए। कठोर कार्यात्मक औचित्य दिखाई पड़ता हो तो ही ऐसी मांग कैडर रिव्यू में शामिल करें। जब कोई पद एडवांस तकनीक व बदलावों के चलते अनावश्यक हो गया हो तो उस पद या सेवा का विलय करें। उसे खत्म करने का प्रपोजल भेज दें। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि उस कैडर रिव्यू का फीडर ग्रेड पर कोई असर न हो। वित्तीय निहितार्थ को अवश्य ध्यान रखें। खासतौर पर वर्कलोड को बढ़ाने के लिए इस बात पर गौर करें।

अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा, ये ध्यान रखें

नॉन फंक्शनल अपग्रेडेशन, नॉन फंक्शनल सेलेक्शन ग्रेड, नॉन फंक्शनल सेकेंड ग्रेड, डायनेमिक एस्योर्ड करियर प्रोग्रेशन, फ्लेक्सिबल कॉम्पिलीमेंटरी स्कीम आदि पर गौर किया जाए। इन सब की वजह से कितना अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा, इसका ब्यौरा अवश्य दिया जाए। हर एक कैडर रिव्यू पांच साल के लिए होता है। अगर ये महसूस होता है कि कैडर समीक्षा की कोई जरूरत नहीं है तो अपने मंत्री इंचार्ज की मंजूरी लेकर उसे विभाग को प्रेषित कर दिया जाए। कैडर समीक्षा के लिए सभी मंत्रालय, विभाग एक सक्षम अधिकारी नियुक्त करें। कैडर रिव्यू कमेटी का चेयरमैन कैबिनेट सेक्रेटरी होगा। इनके अलावा संबंधित कैडर कंट्रोलिंग मंत्रालय का सचिव, डीओपीटी सचिव, वित्त एवं व्यय विभाग का सचिव और संबंधित सेवा का वरिष्ठतम अधिकारी कमेटी में रहेगा। कैबिनेट सेक्रेटरी की मंजूरी से अतिरिक्त आमंत्रित सदस्य भी कमेटी की बैठक में भाग ले सकते हैं।

यहां नहीं मानी जाएगी पदों के सृजन की बात

कैडर रिव्यू, ऑटोमेटिक तरीके से सेंट्रल ग्रुप ए सर्विस या सांगठनिक स्टेटस का दर्जा नहीं देता है। इसके लिए अलग से एक एक्सरसाइज होती है। पांच साल से पहले मिड कैडर रिव्यू चेंज में नए पदों के सृजन की बात नहीं मानी जाएगी। ये केवल पांच साल की अवधि के उपरांत होने वाले कैडर रिव्यू में शामिल होगा। कुछ ऐसे पद जो किन्हीं कारणों से अलग थलग पड़ गए हैं और वे किसी दूसरे कैडर में विलय भी नहीं हो रहे हैं, ऐसे पदों को सीधी भर्ती से न भरा जाए। उन्हें तबादला या प्रतिनियुक्ति के जरिए भरने का प्रयास करें। कैडर रिव्यू में रेग्युलर ड्यूटी पोस्ट व रिजर्व का जिक्र अवश्य करें। रिजर्व में प्रोबेशनरी, लीव, ट्रेनिंग व डेपुटेशन के कॉलम को अच्छे से भरें। यह ध्यान रखना होगा कि जो अधिकारी सीधी भर्ती से आए हैं, उन्हें पांचवें या छठे साल में जूनियर टाइम स्केल से सीनियर टाइम स्केल में पदोन्नत कर दिया जाए। जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड, सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड, व एनएफएसजी का सख्ती से पालन करें। जूनियर टाइम स्केल वाले पदों में से पचास फीसदी पदों को सीधी भर्ती के द्वारा भरा जाए। जेटीएस से उच्च ग्रेड वाले और एसएजी तक के पदों को पदोन्नति के जरिए भरा जाए।

पूर्व की कैडर रिव्यू प्रक्रिया में रही हैं ये कमियां

कैडर रिव्यू में कार्यात्मक स्पष्टता का अभाव होता है। कमजोर भर्ती प्लानिंग रही है। ठीक तरह से पदों का विवरण नहीं दिया जाता। ये सब प्रक्रिया एडवांस होनी चाहिए। कई दफा बड़ी संख्या वाले फंक्शनल पद, फंक्शनल सर्विस से बाहर होते हैं। सांगठनिक ढांचा ठीक नहीं होता। रिजर्व का कमजोर खाका बना रहता है। भर्ती के नियमों का अभाव देखा गया है। एसटीएस को 5 साल, जेएजी 9 साल, एनएफएसजी 14 साल, एसएजी 17 साल और एचएजी के ग्रेड तक पहुंचने के लिए 25 साल लगने चाहिए। यह प्रक्रिया सुस्त न हो। सांगठनिक बदलावों को सदैव ध्यान में रखा जाए। मौजूदा समय में आउटसोर्स प्रक्रिया को लेकर गौर किया जाए। कई विभागों में इस प्रक्रिया के तहत भरे गए पद, कारगर साबित होते हैं। पदोन्नति में देरी न हो और समय पर डीपीसी की बैठक हो। रिक्रूटमेंट रूल या सेवा नियम तय समय पर बनाए जाएं।

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