केंद्र सरकार ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण में नियुक्तियों से संबंधित प्रस्ताव मंत्रिपरिषद की नियुक्ति समिति को भेजा गया है। न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कि इस मामले को और ज्यादा नहीं लटकाया जा सकता क्योंकि नियुक्तियों में विलंब की वजह से यह अधिकरण न्यूनतम क्षमता से भी कम सदस्यों से काम कर रहा है। पीठ एनजीटी बार एसोसिएशन (पश्चिमी क्षेत्र) की इस अधिकरण में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां करने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
पीठ ने कहा, ‘फिलहाल, इस मामले में और कुछ कहे बगैर ही हम इसकी सुनवाई चार सप्ताह के लिए इस उम्मीद से स्थगित कर रहे हैं कि संबंधित लोगों के लिए नियुक्तियों के आदेश जारी करने सहित उचित फैसला लिया जाएगा जो इसके तुरंत बाद पदभार ग्रहण कर सकते हैं।’
अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एन वेंकटरमण ने पीठ से कहा कि न्यायिक और तकनीकी सदस्यों की नियुक्तियों के बारे में प्रस्ताव एसीसी के पास भेजा गया है जो अंतिम निर्णय लेने वाला प्राधिकारी है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि इस आदेश की एक प्रति पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव को उनकी जानकारी और उचित कार्रवाई और इसके अनुपालन की रिपोर्ट पेश करने के लिए भेजी जाए।
शीर्ष अदालत को इससे पहले 23 जुलाई, 2020 को सूचित किया गया था कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण में न्यायिक सदस्यों के सात और विशेषज्ञों के छह पद रिक्त हैं। न्यायालय ने इस तथ्य का भी संज्ञान लिया था कि इनके अलावा, अधिकरण के एक विशेषज्ञ ने 17 जुलाई, 2020 को त्याग पत्र दे दिया है जबकि एक अन्य विशेषज्ञ सदस्य 30 जुलाई को अवकाशग्रहण करने की आयु पर पहुंच गए लेकिन आदेश के अनुसार वह अपने पद पर कार्य कर रहे हैं।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण कानून में पांच क्षेत्रों- उत्तरी, दक्षिणी, मध्य, पूर्वी और पश्चिमी- का प्रावधान है और इसके लिए अध्यक्ष तथा 20 सदस्यों का प्रावधान है। इन 20 सदस्यों में 10 न्यायिक और 10 विशेषज्ञ सदस्य होंगे।