केंद्र ने कहा कि इसके अलावा, सामाजिक-आर्थिक और वंचित वर्गों के लिए टीकाकरण के वास्ते घर-घर जाने में लगने वाले अधिक समय के चलते टीके के अपव्यय की आशंका है। टीके की एक शीशी को एक बार खोलने के बाद उसे 4 घंटे में इस्तेमाल करना होता है। प्रत्येक लाभार्थी तक पहुंचने में समय लगेगा और इससे टीके की खुली शीशी का अपव्यय होगा।
सरकार ने बताया कि घर पर टीकाकरण से स्वास्थ्य सेवा कर्मियों और अग्रिम मोर्चे के स्वास्थ्य कर्मियों पर उन लोगों के टीकाकरण का अनुचित दबाव डाला जा सकता है जिनका नाम लाभार्थियों की सूची में नहीं है। इसलिए इन स्वास्थ्यकर्मियों को अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत होगी।
सरकार ने का इसके अलावा, टीका लगाने वाले जब टीका लगाने के लिए विभिन्न स्थानों की यात्रा करेंगे तो उनके कोविड-19 से संक्रमित होने का खतरा रहेगा। टीकाकरण टीम को घर पर बैठने की जगह की आवश्यकता होगी और उन्हें लाभार्थी के घर के अंदर कुछ समय बिताना होगा। सरकार ने कहा कि भारत में बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है जिसका प्रशासन जमीनी स्तर पर पंचायत की इकाइयों द्वारा किया जाता है।
सरकार ने कहा, ‘‘देश के डिजिटल युग में प्रवेश करने के बाद इन सभी ग्राम पंचायतों ने सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) की स्थापना की है, जिनके पास लोगों द्वारा उपयोग किए जाने वाले डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म हैं। इन सीएससी और इसके बुनियादी ढांचे का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक और प्रभावी रूप से किया जाता है। इससे इंटरनेट की पहुंच उन व्यक्तियों तक होती है जो इसका उपयोग करने में हो सकता है कि निपुण नहीं हों या उनकी इस तक सीधी पहुंच नहीं हो।’’
केंद्र ने कहा कि सभी श्मशान घाटों में काम करने वाले श्मशान के मजदूरों (चाहे वे स्थायी हों, संविदा पर हों या ठेकेदारों द्वारा काम पर रखे गए हों) उन्हें पहले से ही अग्रिम मोर्चे के कर्मियों’ की श्रेणी में शामिल किया गया है। केंद्र ने कहा कि इसी तरह, कोविड-19 गतिविधियों में शामिल ग्रामीण क्षेत्रों के सभी पंचायत कर्मियों को भी अग्रिम मोर्चे के कर्मियों की श्रेणी में शामिल किया गया है, चाहे वे किसी भी उम्र के हों।