केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालयों में विभागों के हिसाब से एससी-एसटी अध्यापकों के आरक्षण के मामले पर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट ने फैसला दिया था कि पूरे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में कुल पदों की संख्या के बजाय हर विभाग में पदों की संख्या के आधार पर आरक्षण दिया जाए।
मानव संसाधन विकास मंत्री
प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि मंत्रालय और यूजीसी ने इस मामले में विशेष अवकाश याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि जल्द ही फैसला आ जाएगा। अप्रैल, 2017 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बीएचयू में अध्यापकों की नियुक्ति के मामले की सुनवाई के दौरान आदेश दिया था कि पूरे विश्वविद्यालय के बजाय हर विभाग को एक इकाई मानकर एस-एसटी अध्यापकों की गणना की जाए।
5 मार्च, 2018 को यूजीसी ने इस नई व्यवस्था के लिए सर्कुलर जारी कर दिया। विभिन्न दलित संगठनों ने यूजीसी के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि इससे विश्वविद्यालयों में अध्यापकों के आरक्षित पदों की संख्या घट जाएगी।