केंद्र सरकार ने गुरुवार को बंबई उच्च न्यायालय से कहा कि वह 5 जुलाई तक ‘फैक्ट चेक’ इकाई निकाय के गठन की सूचना नहीं देगा, जिसे सरकार की किसी भी गतिविधि के संबंध में झूठी या नकली ऑनलाइन समाचारों की पहचान करने और टैग करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत अधिकार प्राप्त है।
बता दें, सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में हालिया संशोधनों को चुनौती देने वाली स्टैंड अप कॉमेडियन कुणाल कामरा की याचिका के जवाब में न्यायमूर्ति गौतम पटेल और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ के समक्ष यह बयान दिया गया।
बंबई उच्च न्यायालय ने सरकार के आश्वासन को स्वीकार कर लिया है। पीठ ने कहा कि ‘फैक्ट चेक’ इकाई के अभाव में संशोधित नियम निष्क्रिय हो जाएंगे, इसलिए नियमों पर रोक लगाने के स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के अनुरोध पर तत्काल सुनवाई करने की जरूरत नहीं है। बता दें, कामरा ने याचिका में संशोधित नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। खंडपीठ ने उनकी याचिका पर अगली सुनवाई के लिए आठ जून की तारीख निर्धारित कर दी।
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने उच्च न्यायालय से कहा कि ‘फैक्ट चेक’ इकाई को पांच जुलाई 2023 तक अधिसूचित नहीं किया जाएगा, ताकि अदालत जून में इस मामले की सुनवाई कर सके। वहीं, कामरा के वकील डेरियस खंबाटा ने जोर देकर कहा कि अदालत अंतरिम राहत के लिए गुरुवार को ही मामले की सुनवाई करे। उन्होंने तर्क दिया कि संशोधित नियमों को लेकर आशंकाएं बरकरार रहेंगी।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने कहा कि ‘फैक्ट चेक’ इकाई के गठित या अधिसूचित न होने तक संशोधित नियम निष्प्रभावी रहेंगे। न्यायमूर्ति पटेल ने कामरा से मजाक करते हुए कहा कि अगर यह दलील देना चाहते हैं कि वह कुछ ऐसी टिप्पणी या व्यंग्य करने जा रहे हैं, जिसे लेकर उन्हें बाद में कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, तो उन्हें शायद गर्मियों की छुट्टी ले लेनी चाहिए।
पीठ ने कामरा को इस मुद्दे पर कार्यपालिका की क्षमता को चुनौती देने के लिए अपनी याचिका में संशोधन करने की अनुमति दी है।