जनगणना का दूसरे चरण से पहले जनगणना ब्लाकों की भौगोलिक सीमाओं को दुरुस्त किया जाएगा। इससे प्रशासनिक सीमाओं की गड़बड़ियां दूर कर दोहरे दर्ज क्षेत्र हटाए जाएंगे। पहले चरण में छूटे आवासीय इलाकों की पहचान कर उन्हें ठीक किया जाएगा। किसी गांव, बस्ती, मकान या आवासीय क्षेत्र के छूटने अथवा दोहरी गणना की आशंका को भी समाप्त करने पर जोर दिया जा रहा है।
असल में देशभर में करीब 24.25 लाख मकान सूचीकरण ब्लॉकों का डिजिटल मानचित्र तैयार करने का काम पूरा हो गया है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय ने सभी जनगणना अधिकारियों को कहा है कि यह सब काम 25 नवंबर तक पूरा कर लें।
बताते चलें कि किसी निश्चित भौगोलिक सीमा में आने वाले परिवारों को एक प्रशासनिक सीमाओं की गड़बड़ियां और छूटे हुए गांव-बस्तियों को भी गणना में जोड़ने के निर्देश ब्लाक में रखा जाता है। इसे जनगणना ब्लॉक कहा जाता है। जनगणना प्रगणक को इस क्षेत्र में आने वाले सभी आवास व गैर आवासी भवनों व उसमें रहने वालों की गणना करनी होती है।
जनगणना अधिकारियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती ब्लॉकों की सीमाओं में मौजूद विसंगतियों को दूर करना है। कई स्थानों पर आसपास के दो मकान सूचीकर ब्लॉकों की सीमाएं एक-दूसरे से ओवरलैप कर रही हैं। इससे एक ही इलाके की दो बार गणना होने की आशंका है। स्वचालित प्रणाली के अलावा उनका फील्ड में जाकर सत्यापन और सुधार कराया जा रहा है। इसके लिए ओवरलैप टूल को अपग्रेड कर एचएलबी रिव्यू नाम दिया गया है।