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WB: 'पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव हमारी प्राथमिकता', बोले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

Tue, 10 Mar 2026 10:50 AM IST
Riya Dubey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा है कि राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित किया जाएगा व किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटेगा। आइए विस्तार से जानते हैं।
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ज्ञानेश कुमार, मुख्य चुनाव आयुक्त - फोटो : PTI
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विस्तार
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि पिछले दो दिनों में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों का विस्तृत आकलन किया है। उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना है।

राज्य में मतदाताओं की संख्या किन देशों के बराबर है?

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं और यहां के लोग शांतिपूर्ण व सहभागी लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं। ज्ञानेश कुमार ने बताया कि राज्य में मतदाताओं की संख्या फ्रांस और उरुग्वे जैसे देशों के कुल मतदाताओं के बराबर है।

राज्य में कितने मतदान केंद्र बनाए गए हैं?

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि राज्य में करीब 80,000 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से लगभग 61,000 ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। सभी मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग की व्यवस्था की जाएगी ताकि मतदान प्रक्रिया की निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

हटाए गए नामों को लेकर क्या बताया गया?

उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची शुद्ध हो और सभी योग्य मतदाताओं के नाम सूची में मौजूद हों।

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इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान सरकारी अधिकारियों का पूर्णत: निष्पक्ष और गैर-पक्षपाती आचरण बेहद आवश्यक है। सभी एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे पूरी निष्पक्षता के साथ काम करें।

ज्ञानेश कुमार ने बताया कि विधानसभा चुनाव के चरणों की संख्या राज्य की कानून-व्यवस्था की तैयारियों के आधार पर तय की जाएगी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी SIR पोर्टल में आई तकनीकी बाधाओं पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि इन्हें दूर किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी समस्या न हो।

बैठकों का मुख्य उद्देश्य और एजेंडा

इस दौरे का प्रमुख उद्देश्य राज्य में चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, स्वतंत्र और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए की जा रही तैयारियों का गहन मूल्यांकन करना है। बैठकों में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की जा रही है:

  • सुरक्षा व्यवस्था: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की तैनाती और राज्य पुलिस के साथ उनके समन्वय की समीक्षा।
  • मतदान केंद्रों की व्यवस्था: मतदान केंद्रों की भौतिक स्थिति, वहां आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता और सुरक्षा का आकलन।
  • लॉजिस्टिक व्यवस्था: चुनाव सामग्री का वितरण, मतदान कर्मियों की तैनाती और अन्य लॉजिस्टिक पहलुओं की योजना।
  • मतदाता सूची की समीक्षा: मतदाता सूची में कथित तौर पर की गई अनियमितताओं और विसंगतियों से संबंधित विवादों पर भी चर्चा।
  • राजनीतिक दलों से संवाद: सोमवार को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में चुनावों को एक या दो चरणों में कराने और मतदाताओं को डराने-धमकाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के सुझाव दिए गए।

विवाद और चिंताएं

चुनाव आयोग के दौरे के साथ ही, विशेष गहन संशोधन (SIR) के बाद मतदाता सूची में कथित तौर पर की गई मनमानी कटौतियों को लेकर विवाद भी गरमाया हुआ है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस मुद्दे पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर राज्य के अधिकारियों को धमकाने का आरोप लगाया है, जिससे राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।

चुनाव आयोग का तीन दिवसीय दौरा

यह बैठकें चुनाव आयोग की पश्चिम बंगाल की तीन दिवसीय यात्रा का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों के लिए राज्य में चुनाव की तैयारियों का समग्र जायजा लेना है। आयोग ने सोमवार को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी, जिन्होंने चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने में सहयोग का आश्वासन दिया था।

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