मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि पिछले दो दिनों में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों का विस्तृत आकलन किया है। उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं और यहां के लोग शांतिपूर्ण व सहभागी लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं। ज्ञानेश कुमार ने बताया कि राज्य में मतदाताओं की संख्या फ्रांस और उरुग्वे जैसे देशों के कुल मतदाताओं के बराबर है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि राज्य में करीब 80,000 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से लगभग 61,000 ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। सभी मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग की व्यवस्था की जाएगी ताकि मतदान प्रक्रिया की निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची शुद्ध हो और सभी योग्य मतदाताओं के नाम सूची में मौजूद हों।
इस दौरे का प्रमुख उद्देश्य राज्य में चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, स्वतंत्र और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए की जा रही तैयारियों का गहन मूल्यांकन करना है। बैठकों में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की जा रही है:
चुनाव आयोग के दौरे के साथ ही, विशेष गहन संशोधन (SIR) के बाद मतदाता सूची में कथित तौर पर की गई मनमानी कटौतियों को लेकर विवाद भी गरमाया हुआ है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस मुद्दे पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर राज्य के अधिकारियों को धमकाने का आरोप लगाया है, जिससे राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।
यह बैठकें चुनाव आयोग की पश्चिम बंगाल की तीन दिवसीय यात्रा का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों के लिए राज्य में चुनाव की तैयारियों का समग्र जायजा लेना है। आयोग ने सोमवार को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी, जिन्होंने चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने में सहयोग का आश्वासन दिया था।