कफ सिरप को लेकर सामने आए मासूम बच्चों की मौत के मामलों पर अब सरकार कड़ा कदम उठा रही है। जिसके तहत केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) कफ सिरप निर्माण पर नजर रखने के लिए एक मजबूत प्रणाली तैयार करेगा। सूत्रों के हवाले से खबर सामने आई है कि सीडीएससीओ सभी राज्यों को ऑडिट के लिए कफ सिरप निर्माण कंपनियों की सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है।
केंद्रीय औषधि नियामक सीडीएससीओ ने कफ सिरप निर्माताओं के परीक्षण, निरीक्षण और ऑडिट के लिए पूरे देश में अभियान शुरू किया है। आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। इसने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ऑडिट के लिए कफ सिरप निर्माता कंपनियों की सूची भी उपलब्ध कराने को कहा है।
यह कदम दूषित कफ सिरप के सेवन से कथित तौर पर बच्चों की मौत के मद्देनजर उठाया गया है। सूत्रों ने आगे कहा कि अभी तक किसी भी राज्य ने सुधारात्मक और निवारक कार्रवाई (सीएपीए) दिशानिर्देशों का पूरी तरह से पालन नहीं किया है, जो दवा उत्पादों में सुरक्षा सुनिश्चित करने और मानकों को बनाए रखने के लिए शुरू किए गए हैं।
अब तक 18 राज्य औषधि नियंत्रण प्राधिकरणों ने ऑनलाइन राष्ट्रीय औषधि लाइसेंसिंग प्रणाली (ओएनडीएलएस) को अपनाया है, जिसका उद्देश्य औषधि लाइसेंसिंग और नियामक अनुपालन को सुव्यवस्थित करना है। ओएनडीएलएस भारत में विभिन्न दवा-संबंधी लाइसेंसों के प्रसंस्करण हेतु एक डिजिटल, एकल-खिड़की प्लेटफॉर्म है और इसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) द्वारा सीडीएससीओ के सहयोग से विकसित किया गया है।
भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने बुधवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों से आग्रह किया था कि वे मध्य प्रदेश में कथित रूप से दूषित कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौतों के मद्देनजर, दवा उत्पादों को बाजार में जारी करने से पहले उनके कच्चे माल और तैयार फॉर्मूलेशन का परीक्षण सुनिश्चित करें।
एक परामर्श में डीसीजीआई ने कहा कि विनिर्माण संयंत्रों के हालिया निरीक्षणों और मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं घोषित की गई दवाओं की जांच के दौरान, यह पाया गया कि कई निर्माता उपयोग से पहले निर्धारित मानकों के अनुपालन के लिए प्रत्येक बैच के एक्सीपिएंट्स और सक्रिय अवयवों का परीक्षण नहीं कर रहे हैं। परामर्श में कहा गया है कि मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में हाल ही में बच्चों की मौतों की खबरें आई हैं, जो कथित रूप से दूषित कफ सिरप से जुड़ी हैं और इन कफ सिरप की गुणवत्ता को लेकर चिंताएं हैं।