नई दिल्ली में संयुक्त सिद्धांत जारी करते चीफ डिफेंस ऑफ स्टाफ अनिल चौहान।
- फोटो : ANI
चीफ डिफेंस ऑफ स्टाफ (CDS) अनिल चौहान ने सोमवार को जलस्थलीय अभियान के लिए संयुक्त सिद्धांत (डॉक्टरीन) जारी किया। नई दिल्ली में चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (सीओएससी) की बैठक के दौरान जारी किया गया यह सिद्धांत तीनों सेनाओं के एकीकरण और संयुक्त रूप से काम करने पर जोर देगा। साथ ही जलस्थीय अभियान के संचालन के लिए कमांडरों का मार्गदर्शन करेगा। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस साल यह दूसरा सिद्धांत जारी किया गया है जो विशेष जलस्थलीय अभियान के लिए सशस्त्र बलों को एकीकृत करेगा।
जल-थल क्षमता सशस्त्र बलों को युद्ध और शांति के दौरान हिंद महासागर क्षेत्र में कई तरह के सैन्य अभियान संचालित करने की शक्ति प्रदान करती है। मंत्रालय ने कहा कि ये सैन्य अभियान बहु-क्षेत्रीय सैन्य परिचालनों का एक महत्वपूर्ण घटक हैं और सशस्त्र बलों के बीच सामंजस्य और एकीकरण के सबसे अच्छा उदाहरण हैं।यह सामान्य रूप से सशस्त्र बलों की संयुक्तता और एकीकरण तथा विशेष रूप से जल-थल सैन्य अभियान पर समुचित ध्यान केंद्रित करता है। यह सिद्धांत ऐसे समय में आया है, जब सरकार महत्वाकांक्षी थियेटराइजेशन परियोजना को लागू करने पर विचार कर रही है।
इससे पहले 18 जून को सीडीएस अनिल चौहान ने साइबर जगत के अभियानों के संचालन में कमांडरों का मार्गदर्शन करने वाला संयुक्त सिद्धांत (डॉक्टरीन) जारी किया था। रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि यह सिद्धांत कमांडरों को जटिल सैन्य अभियानों के माहौल में साइबर जगत का संचालन करने में मार्गदर्शन देगा।
मंत्रालय ने सिद्धांत को साइबर जगत के संचालन के लिए संयुक्त सिद्धांत प्रक्रिया को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया था। इस दौरान सीडीएस ने भविष्य के युद्धों में साइबर जगत की भूमिका पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि थल, समुद्र और वायु सहित युद्ध के पारंपरिक क्षेत्रों के अलावा साइबर जगत भी भविष्य के युद्धों में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि साइबर जगत एक चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि थल, समुद्र और वायु क्षेत्र की क्षेत्रीय सीमाओं के विपरीत साइबर जगत एक वैश्विक साझा क्षेत्र है। इसलिए इसकी साझी संप्रभुता है।