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थानों में CCTV फंड के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र और राज्यों से मांगा हिसाब, बैठक के दिए निर्देश

Tue, 28 Apr 2026 03:30 PM IST
Himanshu Singh Chandel वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए राज्यों द्वारा फंड के इस्तेमाल पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) को 6 मई को केंद्र और राज्यों के गृह सचिवों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया है। राज्यों से फंड खर्च का हिसाब मांगा गया है।
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सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा राजस्थान SI भर्ती 2021 मामला - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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क्या आपको पता है कि देश भर के पुलिस थानों में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाने के लिए मिले पैसों का राज्यों ने क्या किया? इस गंभीर सवाल पर अब देश की सबसे बड़ी अदालत, यानी सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि राज्यों को सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए जो भारी-भरकम फंड दिया गया था, उसका उपयोग सही जगह पर हुआ है या नहीं।

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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे को 6 मई को एक अहम बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि इस बैठक में केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बड़े अधिकारी शामिल होंगे। अदालत का मुख्य मकसद यह जानना है कि थानों में कैमरों की कमी क्यों है और जो पैसे आवंटित किए गए थे, उनका क्या हुआ। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 13 मई को तय की है।

सीसीटीवी फंड को लेकर क्या है केंद्र और राज्यों की हिस्सेदारी?
 

  • मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट को फंड के बंटवारे की जानकारी दी।
  • केंद्र शासित प्रदेशों (UT) में थानों के अंदर सीसीटीवी लगाने का 100 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार उठाती है।
  • पहाड़ी राज्यों में सीसीटीवी लगाने के लिए 90 प्रतिशत पैसा केंद्र सरकार देती है, जबकि 10 प्रतिशत खर्च राज्य उठाते हैं।
  • इसके अलावा, बाकी अन्य राज्यों में 60 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकारें खुद उठाती हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को क्या कड़े निर्देश दिए हैं?
 

  • सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि 6 मई को होने वाली बैठक में केंद्र सरकार के गृह सचिव या उनके द्वारा नामित अधिकारी मौजूद रहें।
  • यह नामित अधिकारी संयुक्त सचिव या अतिरिक्त सचिव रैंक से नीचे का बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
  • सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के गृह सचिवों को भी इस महत्वपूर्ण बैठक में अनिवार्य रूप से हिस्सा लेना होगा।
  • बेंच ने सुझाव दिया है कि इस बैठक के जरिए राज्यों से सिर्फ फंड के इस्तेमाल पर जवाब मांगा जाए और इसकी पूरी रिपोर्ट 13 मई को कोर्ट में पेश की जाए।


मामला कैसे पहुंचा अदालत?
 

  • मीडिया में थानों में खराब सीसीटीवी की खबरें आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने खुद (स्वत: संज्ञान लेकर) इस मामले पर कार्रवाई शुरू की थी।
  • बीते 7 अप्रैल को केंद्र सरकार ने अदालत को भरोसा दिया था कि सीसीटीवी लगाने से जुड़े सभी मुद्दे दो हफ्ते में सुलझा लिए जाएंगे।
  • अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने बेंच को बताया था कि वह इस मामले को खुद देख रहे हैं और इस पर तेजी से काम चल रहा है।
  • इससे पहले 26 फरवरी को अदालत ने एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड बनाने और सीसीटीवी ढांचे को बेहतर करने के लिए रूपरेखा तैयार करने का निर्देश दिया था।


थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के कड़े नियम आखिर क्या हैं?
मानवाधिकारों के हनन को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में सभी थानों में सीसीटीवी लगाने का सख्त आदेश दिया था। दिसंबर 2020 में अदालत ने निर्देश दिया था कि सीबीआई (CBI), ईडी (ED) और एनआईए (NIA) जैसी जांच एजेंसियों के दफ्तरों में भी रिकॉर्डिंग वाले कैमरे लगाए जाएं। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, थानों के मुख्य द्वार, प्रवेश और निकास बिंदु, लॉक-अप, गलियारे, लॉबी और रिसेप्शन सहित हर जगह कैमरे होने चाहिए, ताकि कोई कोना न छूटे। इन सीसीटीवी कैमरों में रात में देखने की क्षमता (नाइट विजन), स्पष्ट ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग होनी चाहिए, जिसका डेटा कम से कम एक साल तक सुरक्षित रखा जा सके।

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