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कलकत्ता हाईकोर्ट से बंगाल सरकार फटकार: अदालत ने कहा- बीएसएफ को जमीन सौंपने में राज्य सरकार की लापरवाही उजागर

Tue, 28 Apr 2026 03:27 PM IST
Asmita Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार फटकार लगाया। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने बीएसएफ को जमीन सौंपने में लापरवाही दिखाई है। 
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कलकत्ता उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई। दरअसल, राज्य सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को भूमि सौंपने के कोर्ट के आदेश का पालन नही किया है।कोर्ट ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल को अब तक 127 किलोमीटर की बाड़ में से केवल आठ किलोमीटर के खंड ही दिए गए हैं। उच्च न्यायालय इस मामले की अगली सुनवाई 13 मई को करेगा।

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दरअसल, 27 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह 127 किलोमीटर भूमि, जिसे पहले ही अधिग्रहित/खरीदा जा चुका है।जिसके लिए राज्य सरकार को केंद्र से मुआवजा प्राप्त हो चुका है, उसे 31 मार्च तक बीएसएफ को सौंप दे। 

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हलफनाम दाखिल करने का दिया था निर्देश
नौ जिलों में बीएसएफ को मार्च के अंत तक 127 किलोमीटर की पूरी जमीन नहीं सौंपने के लिए राज्य सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए उच्च न्यायालय ने 22 अप्रैल को राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। जिसमें जनवरी के आदेश का अनुपालन करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी जाए। इसने राज्य सरकार द्वारा अदालत के आदेशानुसार 127 किलोमीटर भूमि के बजाय केवल आठ किलोमीटर भूमि सौंपने पर असंतोष व्यक्त किया।

कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने टिप्पणी की, 'यह आश्चर्यजनक और चौंकाने वाली बात है कि राष्ट्रीय महत्व के मामले में, प्रतिवादी राज्य ने हलफनामे के माध्यम से अपनी रिपोर्ट दाखिल करना उचित नहीं समझा।' इसमें कहा गया है, 'एक अस्पष्ट और टालमटोल वाली रिपोर्ट दाखिल की गई है जिसमें 27 जनवरी, 2026 को इस अदालत के आदेश पारित होने के बाद भूमि सौंपने के लिए क्या कार्रवाई की गई है, इसका दिनांक और स्थान के अनुसार खुलासा नहीं किया गया है।'

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अदालत ने अपने पूर्व आदेश का पालन न करने के लिए रिपोर्ट दाखिल करने वाले अधिकारी पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जिसका भुगतान उसे स्वयं करना होगा। न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन सहित खंडपीठ ने कहा, 'हम इस तरह की टालमटोल भरी और अधूरी रिपोर्ट दाखिल करने की प्रथा की निंदा करते हैं।' अदालत ने राज्य सरकार को एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें 27 जनवरी के आदेश के अनुपालन में जिलेवार उठाए गए दैनिक कदमों की जानकारी दी जाए।

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आदेश का पालन न करने का वजह बताए
खंडपीठ ने निर्देश दिया कि 'रिपोर्ट में 27 जनवरी के आदेश के बाद बीएसएफ को भूमि सौंपने के लिए प्रत्येक जिले द्वारा उठाए गए कदमों का खुलासा होना चाहिए'। राज्य को दो सप्ताह के भीतर हलफनामे के रूप में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। इसमें कहा गया था कि यदि पूरी जमीन नहीं सौंपी जा सकती, तो कम से कम अदालत के आदेश का पालन न करने के कारणों को बताना अनिवार्य है। उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि रिपोर्ट में इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

 

न्यायालय ने यह टिप्पणी की राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में पश्चिम बंगाल सरकार को बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन सौंपने का निर्देश देने की मांग करने वाली लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रता साहा (सेवानिवृत्त) द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दी

 

 

 

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