व्हाट्सएप की पिछले साल जनवरी में आई निजता नीति की 16 महीने से जांच कर रहे भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने दिल्ली हाईकोर्ट से बृहस्पतिवार को कहा कि वह एक इंच आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसकी वजह दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा व्हाट्सएप-फेसबुक को सीसीआई के नोटिस का जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देना है।
इस पर हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि उसने जांच रोकने का कोई आदेश नहीं दिया। उसकी राय में तो दोनों कंपनियों को सीसीआई में अपना जवाब रखना चाहिए। मामले पर अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी।
सीसीआई ने चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच के समक्ष कहा कि उसे जांच जारी रखने दी जाए। दोनों कंपनियों को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए जाएं।
उल्लेखनीय है कि इस मामले सीसीआई ने जृन 2021 में कंपनियों को नोटिस जारी कर उनके द्वारा जमा किए जा रहे नागरिकों के निजी डाटा और इसके कारोबारी उपयोग के संबंध में कई सवाल किए थे। इस साल 3 जनवरी को हाईकोर्ट ने कंपनियों के जवाब दाखिल करने की समय सीमा बढ़ा दी थी।
- नई निजता नीति जारी कर व्हाट्सएप ने पिछले साल जनवरी में भारतीयों को चेताया था कि अगर वे इसे नहीं स्वीकारेंगे तो उन्हें व्हाट्सएप ठीक से उपयोग नहीं करने दिया जाएगा।
- सीसीआई ने नीति की जांच शुरू की, जिसे कंपनियों ने हाईकोर्ट में चुनौती देकर कहा कि नीति पर खुद हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट पहले ही विचार कर रहे हैं।
- सीसीआई ने कहा कि वह नीति से नागरिकों की निजता उल्लंघन की जांच नहीं कर रहा। बल्कि यह पड़ताल कर रहा है कि सोशल मीडिया पर एकाधिकार जमा कर चुकी दोनों कंपनियां इस नीति से लोगों की ऑनलाइन गतिविधियों का हर समय पीछा करके कितना सारा डाटा जमा कर लेंगी।